---विज्ञापन---

देश angle-right

NEET Leak Case: ‘असली जिम्मेदार की पहचान जरूरी’, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा हलफनामा

NEET Leak Case: NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि असली जिम्मेदार की पहचान जरूरी है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और मानव संसाधन मंत्रालय से हलफनामा मांगकर पूछा है कि आगे की परीक्षाएं कैसे कराई जाएंगी. सुप्रीम कोर्ट ने देश के युवाओं को भरोसा दिया है कि उनके भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ या गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी.

---विज्ञापन---

NEET Leak Case: नीट (NEET) पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बेहद सख्त और गंभीर टिप्पणी की है. अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार तब तक बेअसर रहेंगे, जब तक कि उस असली व्यक्ति की पहचान नहीं हो जाती जो इस पूरी लापरवाही और लीक प्रक्रिया के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है. केवल कागजी बदलावों से यह समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होने वाली. सर्वोच्च न्यायालय ने अब इस मामले में केंद्र सरकार को एक नया हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार को इस हलफनामे में यह विस्तार से बताना होगा कि आगे आने वाली परीक्षाएं किस तरह सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की जाएंगी. इस पूरी प्रक्रिया में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व मानव संसाधन मंत्रालय (शिक्षा मंत्रालय) को करना होगा, ताकि नीतिगत स्तर पर पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके.

‘देश के युवाओं को निराश नहीं होने देंगे’

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के लाखों छात्रों और युवाओं की चिंताओं पर मरहम लगाने का काम भी किया. कोर्ट ने देश को आश्वस्त करते हुए कहा कि यह कोई ऐसी समस्या नहीं है जिससे निपटा न जा सके. पीठ ने बेहद भावुक और मजबूत लहजे में कहा: “यह पूरा मामला देश के युवाओं के भविष्य और उनके सपनों से जुड़ा हुआ है. हम परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी या धांधली को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे. देश के युवाओं को किसी भी कीमत पर निराश नहीं होने दिया जाएगा.”

---विज्ञापन---

सुप्रीम कोर्ट ने NTA को फटकारा

नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बेहद सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और सुधारों के लिए बनी उच्च स्तरीय समिति को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जब इतनी कड़ी निगरानी व्यवस्था थी, तो फिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि बिना तय जवाबदेही के केवल सुरक्षा उपाय नाकाफी हैं.

निगरानी में कहां चूक हुई? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

सुनवाई के दौरान पूर्व इसरो (ISRO) अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति और सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। कोर्ट ने डॉ. राधाकृष्णन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे पहले उच्चाधिकार समिति में थे और बाद में निगरानी समिति में आए, तो फिर जमीनी स्तर पर निगरानी कितनी हुई? पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा:
“अगर इतनी सख्त निगरानी के बावजूद यह विफलता हुई है, तो इसका साफ मतलब है कि निगरानी प्रक्रिया में ही कोई गंभीर कमी या चूक रही होगी।”

---विज्ञापन---

समस्या प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में थी: समिति

अदालत के सवालों का जवाब देते हुए डॉ. राधाकृष्णन ने बताया कि समिति ने परीक्षा प्रणाली और प्रशासन को सुधारने के लिए कुल 101 सिफारिशें सौंपी हैं. इनमें से 60 अल्पकालिक सिफारिशों को साल 2025-26 के सत्र में ही लागू किया जा रहा है. जब कोर्ट ने सीधे तौर पर पेपर लीक की वजह पूछी तो उन्होंने स्वीकार किया कि मुख्य समस्या प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में थी, जिसे अब पूरी तरह से मजबूत और अभूतपूर्व तरीके से सुरक्षित किया जा रहा है. उन्होंने भरोसा दिया कि 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा में ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं होगी.

‘बलि का बकरा’ बनाने से नहीं चलेगा काम, जवाबदेही तय हो

सुप्रीम कोर्ट ने दोटूक शब्दों में कहा कि बार-बार समितियों का गठन करने या बैठकें करने से तब तक कोई फायदा नहीं होगा, जब तक शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होती. कोर्ट ने कहा कि किसी एक छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बनाकर व्यवस्था अपनी कमियों को छिपा नहीं सकती. जब तक अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ये संस्थागत कमियां बार-बार सामने आती रहेंगी.

---विज्ञापन---

NTA में डोमेन विशेषज्ञों की कमी और नए बदलाव

समिति ने अदालत के सामने माना कि परीक्षा प्रणाली में डोमेन विशेषज्ञों की भारी कमी थी. अब इसे दूर करने के लिए आईआईटी-जेईई (IIT-JEE) और केंद्रीय विद्यालय संगठन के अनुभवी विशेषज्ञों को इस प्रक्रिया से जोड़ा गया है. केंद्र सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि मामले की जांच जारी है और पूरे मामले पर देश के उच्चतम कार्यकारी स्तर से नजर रखी जा रही है. कोर्ट ने अंत में साफ किया कि तात्कालिक सुरक्षा उपायों के बजाय अब देश की इस सबसे बड़ी परीक्षा प्रणाली में स्थायी और संस्थागत सुधार की जरूरत है.

First published on: May 29, 2026 03:01 PM

End of Article

About the Author

Vijay Jain

सीनियर न्यूज एडिटर विजय जैन को पत्रकारिता में 23 साल से अधिक का अनुभव है.  न्यूज 24 से पहले विजय दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अलग-अलग जगहों पर रिपोर्टिंग और टीम लीड कर चुके हैं, हर बीट की गहरी समझ है। खासकर शहर राज्यों की खबरें, देश विदेश, यूटिलिटी और राजनीति के साथ करेंट अफेयर्स और मनोरंजन बीट पर मजबूत पकड़ है. नोएडा के अलावा दिल्ली, गाजियाबाद, गोरखपुर, जयपुर, चंडीगढ़, पंचकूला, पटियाला और जालंधर में काम कर चुके हैं इसलिए वहां के कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत आदि की समझ रखते हैं. प्रिंट के कार्यकाल के दौरान इन्हें कई मीडिया अवार्ड और डिजिटल मीडिया में दो नेशनल अवार्ड भी मिले हैं. शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Vijay.kumar@bagconvergence.in

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola