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Union Budget 2026: क्या आज होगा ‘एक देश–एक परीक्षा’ का ऐलान, एजुकेशन सेक्टर क्यों कर रहा इसकी मांग?

One Nation One Exam: एजुकेशन सेक्टर एक देश एक एग्जाम की मांग कर रहा है और आज बजट में इसे लेकर बड़ा ऐलान होने की उम्मीद एजुकेशनल एक्सपर्ट्स को है. अगर पूरे देश के लिए एक एग्जाम का पैटर्न लागू हो गया तो शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आ जाएगा. एग्जाम के साथ-साथ पढ़ाई का तरीका भी बदल जाएगा.

Author Edited By : Khushbu Goyal
Updated: Feb 1, 2026 11:56
Budget 2026 One Nation One Exam
एक देश एक एग्जाम से एजुकेशन सेक्टर में क्रांति आने की उम्मीद है.

One Nation One Exam: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज साल 2026-27 का बजट पेश करने जा रही हैं और आज पूरे देश की नजर एजुकेशन सेक्टर के लिए होने वाले ऐलान पर भी है. दरअसल, एजुकेशनल एक्सपर्ट ‘एक देश एक परीक्षा’ का फॉर्मूला लागू करने की मांग कर रहे हैं. अगर आज बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे लेकर कोई भी ऐलान किया तो देश में एजुकेशन सेक्टर में बड़े बदलाव आ जाएगा.

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इसलिए जरूरी है एक देश एक एग्जाम

एजुकेशनल एक्सपर्ट कहते हैं कि देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी की टेक्नोलॉजी जिस तरीके से फल-फूल रही है, उसके अनुसार एजुकेशन और एग्जाम का पैटर्न बदलने की जरूरत है. AI बेस्ड एजुकेशन, टीचिंग, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर काउंसिलिंग और स्किल ट्रेनिंग की जरूरत है, ताकि स्कूल, कोचिंग और इंडस्ट्री मिलकर स्टूडेंट्स को न सिर्फ डिग्री लेने लायक, बल्कि जॉब, एम्प्लॉयमेंट और बिजनेस करने के लायक बना सके.

JEE के परीक्षार्थियों की बढ़ती संख्या

बता दें कि आजकल के युवाओं में JEE एग्जाम को लेकर काफी क्रेज देखने को मिलता है. अगर 1978 में JEE की सीटें देखें तो आज सीटें 7 गुना बढ़ गई हैं, वहीं एग्जाम देने वालों की संख्या भी 48 गुना हो गई है, यानी कॉम्पिटिशन पहले से कहीं ज्यादा टफ हो गया है और बेशक सरकार की तरफ से कॉलेज और सुविधाएं दी गई हैं, लेकिन स्टूडेंट्स पर दबाव बहुत ज्यादा है, जिसे कई बार वे सह नहीं पाते और हादसे हो जाते हैं, इसलिए बदलाव की जरूरत है.

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ग्रेजुएशन के बाद एक कोर्स की जरूरत

एक्सपर्ट कहते हैं कि आजकल कॉम्पिटिटिव एग्जाम बहुत ज्यादा हो गए हैं, जिस वजह से बच्चों के पास विकल्प भी बहुत ज्यादा हैं. ज्यादा विकल्प होने के कारण वे कोई एक ऑप्शन नहीं चुन पाते, जिस वजह से उन पर दबाव बढ़ जाता है. जिस तरह 12वीं के बाद IIM ने एक मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने की पहल की है, उसी तरह हर फील्ड में ग्रेजुएशन के बाद ऐसा कोर्स शुरू किया जाना चाहिए, जिससे युवाओं को सीधे इंडस्ट्री से जुड़ने का मौका मिले.

ट्रेनिंग और करियर गाइडेंस की जरूरत

एक्सपर्ट कहते हैं कि देश में करियर काउंसिलिंग और ट्रेनिंग का अभाव है. युवाओं को न तो कोई करियर के लिए गाइड करने वाला है और न ही उन्हें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग मिल पाती है. देश में सर्टिफाइड करियर काउंसलर हैं, लेकिन युवाओं की संख्या के मुकाबले उनकी संख्या काफी कम है. ऐसे में जब तक युवाओं को सही गाइडेंस और ट्रेनिंग नहीं मिलेगी, तब तक सुधार के सभी प्रयास बेकार ही साबित होंगे और युवा पीढ़ी ऐसे ही नाकाबिल रहेगी.

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First published on: Feb 01, 2026 10:47 AM

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