Union Budget 2026: बजट के बाद सस्ते होंगे स्मार्टफोन या बढ़ेंगे दाम? जानिए पूरी तस्वीर

आज पेश हो रहे केंद्रीय बजट 2026 में मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ा संकेत छिपा है. कस्टम ड्यूटी, मेक इन इंडिया और बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट के बीच सवाल यही है- क्या बजट के बाद स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ेंगी या सरकार देगी राहत? जानिए एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं.

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Union Budget 2026: आज 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना 9वां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं. हर साल की तरह इस बार भी बजट से टैक्स, छूट और कस्टम ड्यूटी से जुड़े बड़े ऐलान की उम्मीद है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है. खासतौर पर स्मार्टफोन जैसे रोजमर्रा के गैजेट्स को लेकर लोगों में यह सवाल है कि बजट के बाद मोबाइल फोन सस्ते होंगे या महंगे. इसी को लेकर इंडस्ट्री और एक्सपर्ट्स के अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं.

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बजट से पहले इंडस्ट्री की बड़ी मांग

बजट से पहले मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने सरकार से कस्टम ड्यूटी में बदलाव की मांग की है. कंपनियों का कहना है कि अगर आयात शुल्क में राहत दी जाती है, तो ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी. इससे भारत में ही स्मार्टफोन मैन्युफैक्चर करने वाली कंपनियों को फायदा होगा और लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलेगा.

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कीमत बढ़ने का अनुमान क्यों?

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में स्मार्टफोन की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कई ब्रांड अब 9,999 रुपये वाले एंट्री-लेवल स्मार्टफोन से दूरी बनाकर 15,000 रुपये और उससे ऊपर के सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं.

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प्रीमियम सेगमेंट पर कंपनियों का जोर

जो कंपनियां कभी बजट स्मार्टफोन के लिए जानी जाती थीं, जैसे शाओमी और रियलमी, अब वे भी प्रीमियम स्मार्टफोन लॉन्च कर रही हैं. इसकी वजह साफ है इस सेगमेंट में कंपनियों को ज्यादा मुनाफा होता है. यही कारण है कि मिड और प्रीमियम रेंज में नए मॉडल ज्यादा देखने को मिल रहे हैं.

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मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी

स्मार्टफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स की कीमतों में हाल के महीनों में बढ़ोतरी हुई है. प्रोसेसर, बैटरी और डिस्प्ले जैसे अहम कंपोनेंट्स की लागत 10 से 15 फीसदी तक बढ़ी है. इसका सीधा असर फोन की अंतिम कीमत पर पड़ सकता है.

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AI फीचर्स ने बढ़ाई लागत

आजकल स्मार्टफोन में AI फीचर्स की मांग तेजी से बढ़ी है. इसके लिए एक्स्ट्रा चिप्स और ज्यादा मेमोरी की जरूरत पड़ती है. बाजार में मेमोरी चिप्स की कमी के कारण उनकी कीमतें भी बढ़ी हैं, जिससे स्मार्टफोन महंगे होने का दबाव बन रहा है.

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बजट से क्या उम्मीदें हैं?

केंद्रीय बजट में स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को लेकर सरकार क्या फैसला लेती है, यह कुछ ही देर में साफ हो जाएगा. अगर कस्टम ड्यूटी में राहत मिलती है, तो कीमतों पर असर सीमित रह सकता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो मोबाइल फोन आने वाले समय में और महंगे हो सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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