Budget Expectation 2026: फाइनेंस इंडस्‍ट्री ने की बजट से मांग, कैप‍िटल गेन टैक्‍स की जगह FII टैक्‍सेशन ले आए सरकार

फाइनेंस इंडस्ट्री यानी बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां और म्यूचुअल फंड कंपनियां. इनकी मांगे इसल‍िए मायने रखती हैं, क्‍योंक‍ि उनकी मांगे घूम-फिरकर आम लोगों की जेब पर ही असर डालती हैं. आइये जानते हैं क‍ि इस बार बजट से फाइनेंस इंडस्‍ट्री क्‍या चाहती है…

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फाइनेंस सेक्‍टर को बजट से क्‍या उम्‍मीदें हैं

फाइनेंस कंपनियां चाहती हैं कि छोटे व्यापारियों को लोन देना आसान बनाया जाए और अगर कोई लोन डूबता है, तो उसकी भरपाई के लिए सरकारी गारंटी (Credit Guarantee) का दायरा बढ़ाया जाए. दूसरी ओर फाइनेंस इंडस्‍ट्री ने की इस बजट से कैप‍िटल गेन टैक्‍स की जगह FII टैक्‍सेशन ले आए की भी मांग की है. फाइनेंस इंडस्ट्री की इस मांग ने बजट 2026 की चर्चाओं में एक नई बहस छेड़ दी है. इसे समझना थोड़ा टेक्‍नीकल हो सकता है, लेकिन अगर इसे अपनी बोलचाल की भाषा में समझें, तो यह शेयर बाजार और निवेश के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव हो सकता है.

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कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) क्या है?

जब आप शेयर, म्यूचुअल फंड या सोना बेचते हैं और उस पर आपको मुनाफा होता है, तो सरकार उस मुनाफे पर टैक्स लेती है. इसे ही कैपिटल गेन टैक्स कहा जाता है. अगर आप 1 साल से कम समय में शेयर बेचते हैं, तो 20% टैक्स लगता है. अगर आप 1 साल से ज्यादा समय बाद बेचते हैं, तो 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के मुनाफे पर 12.5% टैक्स लगता है.

FII टैक्सेशन क्या होता है?
विदेशी निवेशक (FIIs) जब भारत में पैसा लगाते हैं, तो उनके लिए टैक्स के नियम अक्सर अलग और थोड़े आसान होते हैं ताकि देश में विदेशी निवेश (Dollar) आता रहे. फाइनेंस इंडस्ट्री की मांग है कि भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए भी कैपिटल गेन टैक्स की जटिलता हटाकर ‘FII टैक्सेशन मॉडल’ जैसा कुछ लाया जाए.

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मांग क्या है?
फाइनेंस इंडस्ट्री चाहती है कि सरकार अलग-अलग होल्डिंग पीरियड (जैसे 1 साल, 2 साल, 3 साल) और अलग-अलग टैक्स रेट के चक्कर को खत्म कर दे. उनकी मुख्य मांगें ये हैं:

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समान टैक्स रेट: चाहे शेयर हो या म्यूचुअल फंड, सबके लिए टैक्स की दर एक जैसी और फिक्स्ड हो.

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जटिलता खत्म हो: अभी निवेशकों को यह समझने में सिरदर्द होता है कि किस एसेट पर कितना टैक्स लगेगा. इंडस्ट्री चाहती है कि इसे ‘स्ट्रीमलाइन’ (एक जैसा) किया जाए.

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FII जैसा ट्रीटमेंट: जैसे विदेशी निवेशकों को कुछ खास राहतें मिलती हैं, वैसी ही सुविधाएं घरेलू निवेशकों को भी मिलें ताकि वे बाजार में और पैसा लगाएं.

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हैप्पी फिनसर्व के मैनेजिंग डायरेक्टर मधुर कुकरेजा ने कहा क‍ि कैपिटल मार्केट को मजबूत करने और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स को सपोर्ट करने के लिए सोच-समझकर सुधारों की जरूरत है. 12.5% ​​लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को हटाकर FII टैक्सेशन को ग्लोबल तरीकों के साथ अलाइन करने से विदेशी निवेशकों का भरोसा बहाल करने और मार्केट लिक्विडिटी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है. 10 साल से ज्‍यादा समय तक रखे गए इन्वेस्टमेंट के लिए एक अलग बहुत लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स कैटेगरी शुरू करने से कैपिटल को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय बिजनेस को स्थिर फंडिंग मिलेगी. इसके अलावा, सीनियर सिटिजन्स के लिए टैक्स-फ्री इक्विटी विड्रॉल लिमिट बढ़ाने से रिटायरमेंट इनकम की जरूरतों को सपोर्ट मिलेगा. साथ ही इक्विटी मार्केट में लगातार भागीदारी को भी बढ़ावा मिलेगा.

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ब्रांच इंटरनेशनल (इंडिया) के मैनेजिंग डायरेक्टर, नीरज गुप्ता ने कहा क‍ि जैसे-जैसे भारत का डिजिटल क्रेडिट मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, टिकाऊ और ज‍िम्मेदार लेंडिंग पॉलिसी डिजाइन के केंद्र में रहनी चाहिए. हम आने वाले बजट से उम्मीद करते हैं कि वह डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, कर्ज अनुशासन को बढ़ावा देगा और टेक-आधारित क्रेडिट समाधानों के लिए ज्‍यादा स्पष्टता और सपोर्ट देगा, जिससे क्रेडिट तक व्यापक पहुंच और टिकाऊ विकास की नींव रखी जा सके.

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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