महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर SC की सख्त टिप्पणी, कानून बनने पर नहीं बदली समाज की सोच

सिर्फ कानून बनाने से नहीं मिलेगी सुरक्षा! महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने समाज को दिखाया आईना. कोर्ट ने क्यों कहा कि ‘बदलनी होगी अपनी सोच’? पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की वो कड़ी टिप्पणी जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है.

Supreme Court big decision on religious conversion
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देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून तो बना दिए गए हैं, लेकिन क्या वाकई जमीनी स्तर पर हालात बदले हैं? सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर एक बेहद गंभीर और चुभने वाली टिप्पणी की है. अदालत का मानना है कि सिर्फ कानून बना देने से महिलाओं के खिलाफ हिंसा खत्म नहीं होगी, क्योंकि समाज की मानसिकता आज भी वहीं रुकी हुई है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त कानून मौजूद हैं. इसके बावजूद, हिंसा की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं.

पत्नी के हत्यारोपी की अपील खारिज

यह टिप्पणी तब आई जब अदालत ने अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मारने वाले एक व्यक्ति (शंकर) की अपील को खारिज कर दिया। निचली अदालत और हाईकोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी। कोर्ट ने साफ किया कि पीड़िता द्वारा मृत्यु से पहले दिया गया बयान दोषी को सजा दिलाने के लिए ठोस आधार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि असली समस्या ‘सामाजिक मानसिकता’ में है. जब तक समाज महिलाओं को बराबरी का दर्जा और सम्मान देने की अपनी सोच नहीं बदलेगा, तब तक सबसे सख्त कानून भी बेअसर साबित हो सकते हैं.

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संविधान और हकीकत का अंतर

बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संविधान महिलाओं को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है. हालांकि, हकीकत में महिलाएं आज भी अपने घर से लेकर कार्यस्थल तक असुरक्षित महसूस करती हैं. कोर्ट ने कहा कि पितृसत्तात्मक सोच और महिलाओं को ‘वस्तु’ समझने का नजरिया ही अपराधों की जड़ है.

क्या है समाधान?

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, कानूनी लड़ाई के साथ-साथ एक ‘सामाजिक क्रांति’ की जरूरत है. शिक्षा और जागरूकता के जरिए नई पीढ़ी को यह सिखाना होगा कि महिलाओं का सम्मान कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका मौलिक अधिकार है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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