कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट कहा कि संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है. हालांकि कई बार ऐसे प्रदर्शनों में बिना बुलाए मेहमान आ जाते हैं जिनका मकसद सिर्फ माहौल बिगाड़ना होता है. इस दौरान पुलिस की ओर से भी याचिकाएं दाखिल की गईं, जिनमें बताया गया कि हिंसा में 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. अदालत ने माना कि यह तय करने के लिए कि छात्रों, पुलिस या बाहरी लोगों में से किसने क्या किया, एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की सख्त जरूरत है.
छात्रों ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान छात्रों की ओर से पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए गए. वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन, शादान फरासत और प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि पुलिस अधिकारियों ने तय प्रोटोकॉल की अनदेखी की. छात्रों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन, इलेक्ट्रिकल शॉक गन, इलेक्ट्रिक बैटन और कीलों वाली लाठियों का इस्तेमाल किया गया. सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने लाठियां चलाईं और कई वर्दीधारी पुलिसवालों के पास नाम की पट्टी भी नहीं थी. इसके अलावा चेहरे से पहचान करने वाले सिस्टम (Facial Recognition) के जरिए प्रदर्शनकारियों का उत्पीड़न रोकने की मांग भी उठाई गई.
देश भर की घटनाओं का जिक्र
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी घटनाओं को रखा. कोर्ट में बताया गया कि पेलेट गन के इस्तेमाल से एक 19 साल के युवक की आंखों की रोशनी चली गई और एक घायल लड़की आईसीयू में भर्ती है. बिहार में एके-47 का मामला उठा, वहीं मुंबई में एक प्रदर्शनकारी को नशीले पदार्थों के फर्जी केस में फंसाने की धमकी का वीडियो सामने आया. दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी द्वारा महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने के वीडियो का भी जिक्र हुआ. इसके साथ ही पत्रकारों, वकीलों पर हमले और युवतियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं को भी न्यायाधीश के सामने रखा गया. प्रशांत भूषण ने सांसद मनोज झा की याचिका के जरिए प्रदर्शन से जुड़े जुनैद मलिक के मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा.
सुप्रीम कोर्ट का स्वतंत्र जांच का रुख
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अनीता ठाकुर जैसे पुराने मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले मौजूद हैं, लेकिन बदलते हालातों को देखते हुए पुलिस प्रोटोकॉल को दोबारा देखने की जरूरत है. CJI ने माना कि जिसने भी अत्यधिक बल का प्रयोग किया है, उसकी जांच होनी चाहिए. जांच के लिए प्रशांत भूषण ने दो पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के नाम सुझाए, जिस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच का तरीका CJI खुद तय करें. सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि इन सभी मामलों का सच सामने लाने के लिए एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाएगी.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बंगाल, यूपी और बिहार में जांच में सहयोग के लिए नोटिस जारी किया है. अदालत ने मुख्य सचिवों को सभी सीसीटीवी फुटेज, लॉग बुक और संबंधित सबूतों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि जुनैद मलिक के मामले पर सुनवाई कल होगी, जबकि अन्य सभी याचिकाओं पर अगली सुनवाई अगले सोमवार को की जाएगी. खास बात यह है कि कोर्ट ने हिरासत में लिए गए उन सभी लोगों को रिहा करने का आदेश दिया है जिनकी उम्र 18 साल से कम है या जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.