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US-ईरान युद्धविराम टूटा तो भारत पर क्या होगा असर? जानिए सबसे अच्छे और सबसे बुरे हालात

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने की आशंका ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अगर तनाव फिर बढ़ता है तो इसका सीधा असर भारत की तेल आपूर्ति, महंगाई, व्यापार और शेयर बाजार पर पड़ सकता है. जानिए भारत के लिए सबसे अच्छे और सबसे बुरे संभावित हालात क्या हो सकते हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ युद्धविराम समझौता उनके लिए असल में खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि अब वो तेहरान के साथ कोई कूटनीतिक बातचीत नहीं करना चाहते. फारस की खाड़ी में नई सैन्य झड़पों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम के टूटने से दुनिया भर में बड़े पैमाने पर आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ी अनिश्चितताएं फिर से पैदा हो गई हैं.

ये भी पढ़ें: ‘ईरान के साथ सीजफायर खत्म’, होर्मुज में जहाजों पर हमले से भड़के ट्रंप, अब नहीं चाहते कोई समझौता

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भारत के लिए कैसे हैं हालात

ऊर्जा आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भरता और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ बड़े पैमाने पर व्यापारिक संबंधों की वजह से भारत पर पश्चिम एशिया में अस्थिरता का बहुत ज़्यादा असर पड़ सकता है. होर्मुज स्ट्रेट की पूरी नाकाबंदी से मार्च 2026 का संकट दोहराया जाएगा या और बिगड़ जाएगा, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें 120-130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएंगी. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के इंपोर्ट बिल को बहुत बढ़ा देंगी, करंट अकाउंट डेफिसिट को बढ़ा देंगी और भारतीय रुपया नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच जाएगा. ऊर्जा की बढ़ती कीमतों की वजह से ईंधन, खाने-पीने की चीज़ों और खाद की लागत बढ़ जाएगी. अगर इसके साथ ही अल-नीनो मॉनसून भी अनियमित रहा तो देश में महंगाई और भी ज़्यादा बढ़ जाएगी.

एक्सपोर्ट में आ सकती है गिरावट!

पश्चिम एशिया को होने वाला भारत का एक्सपोर्ट, खासकर UAE को इलेक्ट्रॉनिक्स और ईरान को बासमती चावल का एक्सपोर्ट- बुरी तरह प्रभावित होगा. कुल एक्सपोर्ट में 50% से ज़्यादा की गिरावट आ सकती है, जैसा कि युद्ध की शुरुआत में देखा गया था. मध्य एशिया का दरवाज़ा माने जाने वाले चाबहार पोर्ट में भारत के बड़े निवेश में अनिश्चितकालीन देरी हो सकती है या उसे नुकसान पहुंच सकता है.

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सबसे अच्छी स्थिति

अभी तनाव सिर्फ़ एक-दूसरे पर जवाबी हमले तक ही सीमित है और समुद्र के रास्ते पर पूरी तरह नाकेबंदी नहीं हुई है. फ़िलहाल तेल की कीमतें 75-80 प्रति डॉलर बैरल के आसपास स्थिर हैं. भारत अपनी बदली हुई रणनीति का कामयाबी से इस्तेमाल करके 40 से ज़्यादा देशों से कच्चा तेल मंगा सकता है. इसमें ईरान से मिलने वाला सस्ता तेल और गैस भी शामिल है, जिसकी सप्लाई हाल ही में फिर से शुरू हुई है. जानकारों का कहना है कि मज़बूत तिमाही GST कलेक्शन जैसे लगातार अच्छे संकेतकों की वजह से भारत की GDP ग्रोथ की रफ़्तार 7% के आसपास बनी रह सकती है.

ये भी पढ़ें: Petrol Diesel Price: अमेरिका का एक फैसला… और भारत में सस्ता हो जाएगा पेट्रोल-डीजल! जानिए कैसे हो सकता है संभव?

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First published on: Jul 08, 2026 06:05 PM

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About the Author

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी एक अनुभवी पत्रकार हैं जो पिछले 9 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हैं। वर्तमान में वर्षा News24 में सीनियर सब एडिटर की भूमिका निभा रही हैं। यहां ये नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि खबरें करती हैं। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ वर्षा को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग खबरों का भी बखूबी अनुभव है। खबरों के अलावा वर्षा कहानियां और कविताएं लिखने का भी शौक रखती हैं।

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Varsha Sikri

वर्षा सिकरी एक अनुभवी पत्रकार हैं जो पिछले 9 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हैं। वर्तमान में वर्षा News24 में सीनियर सब एडिटर की भूमिका निभा रही हैं। यहां ये नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि खबरें करती हैं। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ वर्षा को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग खबरों का भी बखूबी अनुभव है। खबरों के अलावा वर्षा कहानियां और कविताएं लिखने का भी शौक रखती हैं।

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