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उत्तर भारत में बढ़ेगा बारिश और तूफान का कहर! जानिए क्यों बन रहे हैं मौसम के ऐसे हालात?

Monsoon In North India: दिल्ली समेत उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन अभी इस क्षेत्र में मानसून और तूफान का और ज्यादा कहर देखने को मिल सकता है, क्योंकि यहां वेदर कंडीशन इस बात की तरफ इशारा कर कर रहा है.

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Heavy Rain Alert Across North India: आने वाले दिनों में उत्तर भारत में मानसून की जबरदस्त गतिविधि देखने को मिल सकती है, क्योंकि मौसम के 2 बड़े सिस्टम आपस में मिल रहे हैं. इससे बड़े पैमाने पर बारिश, आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस मेल से तापमान में गिरावट आ सकती है और कई उत्तरी राज्यों में बारिश तेज हो सकती है.

‘डीप डिप्रेशन’ का असर

पहला सिस्टम एक ‘डीप डिप्रेशन’ (गहरा कम दबाव का क्षेत्र) है जो उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना था. 27 और 28 जुलाई के बीच दीघा के पास पश्चिम बंगाल-ओडिशा तट को पार करने के बाद, ये ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ से होकर गुजरा, जिससे कई इलाकों में भारी बारिश हुई. 29 जुलाई तक, ये वेदर सिस्टम मध्य छत्तीसगढ़ और रायगढ़ के पास ओडिशा के उत्तरी अंदरूनी इलाकों में केंद्रित था और पश्चिम की ओर पूर्वी मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ रहा था.

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‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ का भी इफेक्ट

हालांकि जमीन पर आने के बाद इस डिप्रेशन की ताकत धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन ये मानसून के बहाव में भारी मात्रा में नमी पहुंचा रहा है. उम्मीद है कि ये नमी पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में अभी सक्रिय एक नए ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ (पश्चिमी विक्षोभ) के साथ मिल जाएगी. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आमतौर पर भूमध्य सागर से आते हैं और अक्सर उत्तर-पश्चिमी भारत और हिमालयी राज्यों में बारिश बढ़ाते हैं.

इन राज्यों में भारी बारिश की आशंका

इन दोनों वेदर सिस्टम के मेल से अगले कुछ दिनों में दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, यूपी और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश बढ़ने की उम्मीद है. बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं भी चल सकती हैं. इस बीच, छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि मध्य प्रदेश, विदर्भ और तेलंगाना में भी जोरदार बारिश हो सकती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश दर्ज की जा सकती है.

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मौसम वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि मानसून के ये सक्रिय हालात दक्षिण-पश्चिम मानसून को और बेहतर बना सकती है, जो जून में कमजोर शुरुआत के बाद जुलाई में काफी बेहतर हुआ था. हालांकि पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में मौसमी बारिश अभी भी नॉर्मल से कम है, लेकिन हाल की वेदर एक्टिविटीज ने कुल बारिश की कमी को कम किया है और कई मध्य और पश्चिमी क्षेत्रों में हालात बेहतर किए हैं.

First published on: Jul 29, 2026 06:02 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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