RBI Action NBFC License Cancelled: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय बाजार में शुचिता बनाए रखने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने देश की 150 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. आरबीआई की इस सख्त कार्रवाई से पूरे कॉर्पोरेट जगत और वित्तीय गलियारों में हड़कंप मच गया है. आरबीआई द्वारा जारी की गई सूची पर नजर डालें तो इस कार्रवाई की सबसे बड़ी मार देश के दो प्रमुख राज्यों पर पड़ी है. रद्द किए गए 150 लाइसेंसों में से आधे से ज्यादा कंपनियां सिर्फ पश्चिम बंगाल और दिल्ली की हैं.
पश्चिम बंगाल की 75 और दिल्ली की 67 कंपनियों पर गाज
पश्चिम बंगाल की करीब 75 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन खत्म कर दिया गया है. राजधानी दिल्ली की लगभग 67 कंपनियों पर ताला लग गया है. इनके अलावा तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा की भी कई कंपनियां इस कार्रवाई की चपेट में आई हैं.
आखिर क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?
रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम- 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए की है. आमतौर पर आरबीआई ऐसी सख्त कार्रवाई तब करता है जब कंपनियां तय वित्तीय मानकों (जैसे मिनिमम नेट ओन्ड फंड) को पूरा नहीं कर पातीं. इसके अलावा रेगुलेटरी गाइडलाइंस और नियमों की लगातार अनदेखी करती हैं या लंबे समय से निष्क्रिय (Inactive) पाई जाती हैं.
अब इन कंपनियों का क्या होगा?
लाइसेंस रद्द होने का मतलब है कि अब ये कंपनियां पूरी तरह से बैन हो गई हैं. ये अब किसी भी प्रकार की वित्तीय गतिविधि (Financial Activity) नहीं कर सकेंगी. नियमों के मुताबिक, अब ये कंपनियां न तो बाजार से नया डिपॉजिट ले सकती हैं और न ही ग्राहकों को किसी तरह का लोन या अन्य सेवाएं दे सकती हैं.
क्या होती हैं NBFC कंपनियां?
आसान शब्दों में कहें तो NBFC ऐसी संस्थाएं होती हैं जो बैंक की तरह ही लोगों को लोन देती हैं और निवेश का काम करती हैं. हालांकि, इनके पास बैंकों की तरह फुल बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता और ये बचत या चालू खाता नहीं खोल सकतीं. इन पर नियंत्रण रखने की पूरी जिम्मेदारी आरबीआई की होती है.
RBI Action NBFC License Cancelled: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय बाजार में शुचिता बनाए रखने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने देश की 150 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. आरबीआई की इस सख्त कार्रवाई से पूरे कॉर्पोरेट जगत और वित्तीय गलियारों में हड़कंप मच गया है. आरबीआई द्वारा जारी की गई सूची पर नजर डालें तो इस कार्रवाई की सबसे बड़ी मार देश के दो प्रमुख राज्यों पर पड़ी है. रद्द किए गए 150 लाइसेंसों में से आधे से ज्यादा कंपनियां सिर्फ पश्चिम बंगाल और दिल्ली की हैं.
पश्चिम बंगाल की 75 और दिल्ली की 67 कंपनियों पर गाज
पश्चिम बंगाल की करीब 75 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन खत्म कर दिया गया है. राजधानी दिल्ली की लगभग 67 कंपनियों पर ताला लग गया है. इनके अलावा तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार और हरियाणा की भी कई कंपनियां इस कार्रवाई की चपेट में आई हैं.
आखिर क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?
रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम- 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए की है. आमतौर पर आरबीआई ऐसी सख्त कार्रवाई तब करता है जब कंपनियां तय वित्तीय मानकों (जैसे मिनिमम नेट ओन्ड फंड) को पूरा नहीं कर पातीं. इसके अलावा रेगुलेटरी गाइडलाइंस और नियमों की लगातार अनदेखी करती हैं या लंबे समय से निष्क्रिय (Inactive) पाई जाती हैं.
अब इन कंपनियों का क्या होगा?
लाइसेंस रद्द होने का मतलब है कि अब ये कंपनियां पूरी तरह से बैन हो गई हैं. ये अब किसी भी प्रकार की वित्तीय गतिविधि (Financial Activity) नहीं कर सकेंगी. नियमों के मुताबिक, अब ये कंपनियां न तो बाजार से नया डिपॉजिट ले सकती हैं और न ही ग्राहकों को किसी तरह का लोन या अन्य सेवाएं दे सकती हैं.
क्या होती हैं NBFC कंपनियां?
आसान शब्दों में कहें तो NBFC ऐसी संस्थाएं होती हैं जो बैंक की तरह ही लोगों को लोन देती हैं और निवेश का काम करती हैं. हालांकि, इनके पास बैंकों की तरह फुल बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता और ये बचत या चालू खाता नहीं खोल सकतीं. इन पर नियंत्रण रखने की पूरी जिम्मेदारी आरबीआई की होती है.