Kumar Gaurav
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Assembly elections in five states: 2026 का साल राजनीति के लिहाज़ से बेहद अहम साबित होने जा रहा है. एक ओर पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव है . जहाँ पश्चिम बंगाल में बीजेपी और ममता बनर्जी की टीएमसी के बीच मुकाबला होगा , वही केरल में मुख्य मुक़ाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच है जहां बीजेपी भी अपनी जमीन तैयार करने की जुगत में है . तमिलनाडु में इंडिया अलायन्स और एनडीए के बीच मुक़ाबला होगा , असम में बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने होगी और पुडुचेरी में एनडीए और इंडिया अलायंस में बीच मुकाबला होगा . वहीं दूसरी ओर राज्यसभा की करीब 73 सीटें खाली होंगी. इन चुनावों से न केवल ऊपरी सदन का शक्ति संतुलन बदलेगा, बल्कि मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद के स्वरूप पर भी सीधा असर पड़ने की संभावना है.
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बिहार से राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का कार्यकाल भी 2026 में समाप्त हो रहा है. हरिवंश जेडीयू कोटे से राज्यसभा सदस्य हैं. ऐसे में बिहार की 5 राज्यसभा सीटों को लेकर एनडीए के भीतर पहले से ही खींचतान की स्थिति बन गई है. हालांकि बीजेपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला के अनुसार – बीजेपी सभी सहयोगी दलों को “उचित प्रतिनिधित्व” देने की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता अजय उपाध्याय एनडीए के भीतर चल रही इस रस्साकशी पर सियासी चुटकी ले रहे हैं .
2026 में राज्यसभा से रिटायर होने वालों में कई बड़े और अनुभवी नाम शामिल हैं:
इसके अलावा राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य और पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कार्यकाल भी मार्च 2026 में पूरा होगा.
इसके अलावा मध्य प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से भी सीटें खाली होंगी.
राज्यसभा से रिटायर हो रहे नेताओं में केंद्र सरकार के कई मंत्री भी शामिल हैं. इनमें खास तौर पर
इन मंत्रियों को दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा या नहीं, यह फैसला आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक रणनीति और कैबिनेट विस्तार से जुड़ा होगा.
बीजेपी के भीतर नितिन नवीन जैसे युवा नेताओं के उभार के बीच यह साफ देखा गया है कि मोदी सरकार हर कैबिनेट विस्तार और फेरबदल में मंत्रिपरिषद की औसत उम्र कम करती जा रही है.
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आगामी फेरबदल में यह औसत उम्र और घट सकती है. ऐसे में 2026 में राज्यसभा से रिटायर हो रहे वरिष्ठ मंत्रियों के भविष्य पर सवाल खड़े होना तय माना जा रहा है.
राजनीतिक आकलन के मुताबिक 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनावों में एनडीए को करीब 48 सीटें मिलने की संभावना है. अगर यह अनुमान सही बैठता है, तो ऊपरी सदन में सरकार की स्थिति और मजबूत होगी और विधायी कामकाज आसान हो जाएगा. 2026 का साल सिर्फ राज्यसभा चुनावों का नहीं, बल्कि मोदी सरकार के अगले राजनीतिक और नेतृत्वीय ढांचे की दिशा तय करने वाला साल भी होगा—जहां सत्ता का गणित, सहयोगी दलों की मांगें और युवा नेतृत्व की राजनीति एक साथ टकराती दिखेगी.
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