राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए हाल में हुए चुनाव ने संसद के ऊपरी सदन की तस्वीर बदल दी है. इन चुनाव के बाद एनडीए ने न सिर्फ निर्णायक बढ़त हासिल की है, बल्कि अब सदन में उसका बहुमत भी सुनिश्चित हो गया है - एक ऐसा मोड़, जो आने वाले संसदीय सत्रों में सत्ता पक्ष को स्पष्ट बढ़त देता दिख रहा है.
कैसे मिली बढ़त?
37 सीटों में से 11 पर मतदान हुआ, जिसमें एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं, बाकी 26 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ, जहां एनडीए को 13 सीटें मिलीं. इस तरह कुल 37 में से 22 सीटें एनडीए के खाते में गईं, जबकि विपक्ष 15 सीटों पर सिमट गया.
यह भी पढ़ें : राज्यसभा में BJP को वोट करना पड़ा भारी, ओडिशा कांग्रेस ने तीन विधायकों को पार्टी से निकाला
चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने खास प्रदर्शन किया - बिहार और ओडिशा में एक-एक अतिरिक्त सीट हासिल की, जबकि हरियाणा में कांटे की टक्कर के बाद भी एक सीट जीतकर समीकरण अपने पक्ष में कर लिया.
क्या है राज्यसभा का पूरा गणित?
राज्यसभा की कुल प्रभावी संख्या 250 है और बहुमत का आंकड़ा 126 सीटों का है. ताजा स्थिति में एनडीए 135 से बढ़कर 141 सीटों पर पहुंच गया है - यानी बहुमत के आंकड़े से काफी आगे. एनडीए के भीतर सबसे बड़ी ताकत भारतीय जनता पार्टी है, जिसके पास अकेले 106 सीटें हैं. लेकिन असली मजबूती सहयोगी दलों के व्यापक फैलाव से आती है.
यह भी पढ़ें : लोकसभा में विपक्ष के 8 सांसदों का सस्पेंशन खत्म, अब कार्यवाही में ले सकेंगे हिस्सा
किस पार्टी के कितने सदस्य -
- AIADMK - 5 सीट
- जनता दल (यूनाइटेड) - 4 सीट
- नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी - 4 सीट
- तेलुगु देशम पार्टी - 2 सीट
- शिवसेना - 2 सीट
- यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी, लिबरल - 2 सीट
- राष्ट्रीय लोक दल - 1 सीट
- जनता दल (सेक्युलर)- 1 सीट
- असम गण परिषद - 1 सीट
- PMK - 1 सीट
- मिजो नेशनल फ्रंट - 1 सीट
- नेशनल पीपुल्स पार्टी - 1 सीट
- रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) - 1 सीट
- राष्ट्रीय लोक मोर्चा - 1 सीट
- निर्दलीय (कार्तिकेय शर्मा)
इनके अलावा 7 नामित सदस्य हैं, जो कुल संख्या को और मजबूती देते हैं.
विपक्ष की तस्वीर
दूसरी ओर, INDIA गठबंधन की ताकत 62 से घटकर 58 सीटों पर आ गई है. हालांकि, कांग्रेस 29 सीटों के साथ अब भी विपक्ष की धुरी बनी हुई है और उसके पास नेता प्रतिपक्ष का पद बरकरार रहेगा. अन्य दलों की स्थिति भी थोड़ी कमजोर हुई है - 47 से घटकर 45 सीटें रह गई हैं.
यह भी पढ़ें : राज्यसभा चुनाव: हरियाणा में कैसे आखिरी पलों में पलटी बाजी? उड़ीसा में क्रॉस वोटिंग से बदल गए विजेता
क्या हैं सियासी मयाने?
अब तक राज्यसभा को सरकार के लिए 'कठिन सदन' माना जाता था, जहां विपक्ष कई बार विधेयकों को अटका देता था. लेकिन नए आंकड़े एक अलग कहानी कह रहे हैं - अब सरकार के पास न सिर्फ बहुमत है, बल्कि सहयोगी दलों के साथ एक स्थिर और सुरक्षित संख्या बल भी है. इसका सीधा असर आने वाले मॉनसून सत्र में दिख सकता है, जहां सरकार के लिए अहम बिलों को पास कराना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान होगा.
राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए हाल में हुए चुनाव ने संसद के ऊपरी सदन की तस्वीर बदल दी है. इन चुनाव के बाद एनडीए ने न सिर्फ निर्णायक बढ़त हासिल की है, बल्कि अब सदन में उसका बहुमत भी सुनिश्चित हो गया है – एक ऐसा मोड़, जो आने वाले संसदीय सत्रों में सत्ता पक्ष को स्पष्ट बढ़त देता दिख रहा है.
कैसे मिली बढ़त?
37 सीटों में से 11 पर मतदान हुआ, जिसमें एनडीए ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं, बाकी 26 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ, जहां एनडीए को 13 सीटें मिलीं. इस तरह कुल 37 में से 22 सीटें एनडीए के खाते में गईं, जबकि विपक्ष 15 सीटों पर सिमट गया.
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क्या है राज्यसभा का पूरा गणित?
राज्यसभा की कुल प्रभावी संख्या 250 है और बहुमत का आंकड़ा 126 सीटों का है. ताजा स्थिति में एनडीए 135 से बढ़कर 141 सीटों पर पहुंच गया है – यानी बहुमत के आंकड़े से काफी आगे. एनडीए के भीतर सबसे बड़ी ताकत भारतीय जनता पार्टी है, जिसके पास अकेले 106 सीटें हैं. लेकिन असली मजबूती सहयोगी दलों के व्यापक फैलाव से आती है.
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किस पार्टी के कितने सदस्य –
- AIADMK – 5 सीट
- जनता दल (यूनाइटेड) – 4 सीट
- नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी – 4 सीट
- तेलुगु देशम पार्टी – 2 सीट
- शिवसेना – 2 सीट
- यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी, लिबरल – 2 सीट
- राष्ट्रीय लोक दल – 1 सीट
- जनता दल (सेक्युलर)- 1 सीट
- असम गण परिषद – 1 सीट
- PMK – 1 सीट
- मिजो नेशनल फ्रंट – 1 सीट
- नेशनल पीपुल्स पार्टी – 1 सीट
- रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) – 1 सीट
- राष्ट्रीय लोक मोर्चा – 1 सीट
- निर्दलीय (कार्तिकेय शर्मा)
इनके अलावा 7 नामित सदस्य हैं, जो कुल संख्या को और मजबूती देते हैं.
विपक्ष की तस्वीर
दूसरी ओर, INDIA गठबंधन की ताकत 62 से घटकर 58 सीटों पर आ गई है. हालांकि, कांग्रेस 29 सीटों के साथ अब भी विपक्ष की धुरी बनी हुई है और उसके पास नेता प्रतिपक्ष का पद बरकरार रहेगा. अन्य दलों की स्थिति भी थोड़ी कमजोर हुई है – 47 से घटकर 45 सीटें रह गई हैं.
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क्या हैं सियासी मयाने?
अब तक राज्यसभा को सरकार के लिए ‘कठिन सदन’ माना जाता था, जहां विपक्ष कई बार विधेयकों को अटका देता था. लेकिन नए आंकड़े एक अलग कहानी कह रहे हैं – अब सरकार के पास न सिर्फ बहुमत है, बल्कि सहयोगी दलों के साथ एक स्थिर और सुरक्षित संख्या बल भी है. इसका सीधा असर आने वाले मॉनसून सत्र में दिख सकता है, जहां सरकार के लिए अहम बिलों को पास कराना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान होगा.