राज्यसभा चुनाव: हरियाणा में कैसे आखिरी पलों में पलटी बाजी? उड़ीसा में क्रॉस वोटिंग से बदल गए विजेता

हरियाणा और ओडिशा के राज्यसभा चुनाव में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. दोनों ही राज्यों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात का ऐसा खेल चला कि चुनाव आयोग को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा. हरियाणा में कांग्रेस साख बचाने में कामयाब हो गई, जबकि ओडिशा में BJP अपने मकसद में कामयाब हो गई.

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हरियाणा विधानसभा में राज्यसभा चुनाव को लेकर 16 घंटे तक चले थका देने वाले सियासी ड्रामे के बाद आखिरकार देर रात सवा एक बजे नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. भारी उठापटक, क्रॉस वोटिंग और एक वोट के रद्द होने के बीच भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार संजय भाटिया और कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध ने अपनी-अपनी सीट पर जीत दर्ज कर ली है. BJP के समर्थन से मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा. वहीं, ओडिशा की 4 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले रहे. विधानसभा में संख्या बल की खींचतान के बीच BJP समर्थित उम्मीदवार की जीत ने हैरान कर दिया.

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हरियाणा में 88 वोट और 10 घंटे का सस्पेंस

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में इस बार केवल 88 विधायकों ने मतदान किया. इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के दोनों विधायकों अर्जुन चौटाला और आदित्य देवीलाल ने दोपहर 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया. शाम 4 बजे वोटिंग खत्म होने के तुरंत बाद दोनों दलों ने एक-दूसरे के विधायकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज करा दीं, जिससे शाम 5 बजे शुरू होने वाली मतगणना पूरी तरह खटाई में पड़ गई. शाम 5 बजे जब मतगणना शुरू होनी थी, तभी BJP और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर ‘वोट की गोपनीयता’ भंग करने का आरोप लगा दिया.

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इन लिखित शिकायतों के कारण मतगणना 5 घंटे की अनिश्चितता में फंसी रही. आखिरकार, चुनाव आयोग के साथ लंबी कागजी कार्रवाई के बाद रात 10:25 बजे दिल्ली से क्लीयरेंस आया और बैलेट पेपर की स्क्रीनिंग शुरू हुई.

नतीजों का गणित: कौन जीता, कौन हारा?

रात 1:10 बजे जब परिणाम घोषित हुए, तो हरियाणा की राजनीति की नई तस्वीर सामने आई. BJP समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल की हार के साथ ही BJP हरियाणा में राज्यसभा सीटों पर जीत की ‘हैट्रिक’ लगाने से चूक गई. वहीं, कांग्रेस ने अपनी सीट बचाकर पिछले दो चुनावों से मिल रही हार के सिलसिले को तोड़ दिया. जीत के बावजूद कांग्रेस के भीतर ‘भीतरघात’ की आहट सुनाई दी. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सख्त रुख के बाद अब सबकी नजरें उन 5 विधायकों पर हैं, जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर BJP समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के पक्ष में मतदान किया.

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हरियाणा में ‘क्रॉस वोटिंग’ का पुराना इतिहास

2022 में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के अजय माकन बनाम BJP JJP समर्थित निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा के बीच था. कांग्रेस के पास पर्याप्त वोट थे, लेकिन कुलदीप बिश्नोई ने क्रॉस वोटिंग कर दी. साथ ही, कांग्रेस के एक विधायक का वोट तकनीकी गलती के कारण रद्द हो गया. अजय माकन एक मामूली अंतर से हार गए और कार्तिकेय शर्मा जीत गए. इस चुनाव ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को पूरी तरह बेनकाब कर दिया था.

वहीं, 2016 में कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट सिर्फ इसलिए रद्द कर दिए गए थे क्योंकि उन्होंने आधिकारिक पेन की जगह दूसरे पेन का इस्तेमाल किया था. इस ‘गलती’ की वजह से कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार आर.के. आनंद हार गए और BJP समर्थित निर्दलीय सुभाष चंद्रा चुनाव जीत गए. कांग्रेस ने इसे गहरी साजिश बताया था, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे मानवीय भूल और नियमों का उल्लंघन माना.

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ओडिशा में क्रॉस वोटिंग ने पलटी बाजी

ओडिशा की 4 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले रहे. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला था, जहां BJP ने अपनी रणनीति से विपक्षी दलों को पस्त कर दिया. 147 सदस्यीय विधानसभा में संख्या बल की खींचतान के बीच BJP समर्थित उम्मीदवार की जीत ने सबको हैरान कर दिया. निर्दलीय मैदान में उतरे दिलीप राय को BJP का समर्थन प्राप्त था, लेकिन उनके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं था.

बीजेडी के 8 विधायकों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाकर दिलीप राय को वोट दिया. कांग्रेस के 3 विधायकों ने भी पाला बदलते हुए BJP समर्थित उम्मीदवार का साथ दिया. कुल 11 विधायकों की क्रॉस वोटिंग की वजह से कांग्रेस और लेफ्ट समर्थित बीजेडी के दूसरे उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता चुनाव हार गए.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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