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‘अमेरिका लिखता है PAK पीएम के ट्वीट’, शशि थरूर का पाकिस्तान पर तीखा तंज

शशि थरूर ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के वायरल ट्वीट पर तंज कसते हुए कहा कि उनके संदेश वाशिंगटन से लिखकर आते हैं. उन्होंने भारत की रणनीतिक खामोशी का भी पुरजोर बचाव किया.

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Written By: Raja Alam Updated: Apr 11, 2026 23:53

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मध्य प्रदेश और मिडिल ईस्ट के संकट के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही बातचीत में पाकिस्तान की मजबूरी और भारत की रणनीति के बीच का अंतर साफ किया है. थरूर ने तंज कसते हुए उस वायरल पोस्ट का जिक्र किया जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया हैंडल पर ‘ड्राफ्ट’ लिखा नजर आया था. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वाशिंगटन ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के लिए संदेश लिखता है. थरूर के मुताबिक भारत जैसा स्वाभिमानी देश कभी ऐसी गलती नहीं कर सकता क्योंकि भारत की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति है.

क्या है ट्वीट के पीछे का राज?

शशि थरूर ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते जगजाहिर हैं. उन्होंने शहबाज शरीफ के उस पोस्ट की तरफ इशारा किया जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदेश से काफी मिलता-जुलता था. थरूर ने तंज कसते हुए कहा कि केवल पाकिस्तान ही वाशिंगटन के साथ इस तरह की भूमिका निभा सकता है जहां उनके संदेश भी बाहर से तय होते हैं. उन्होंने कहा कि अगर भारत में कोई प्रधानमंत्री के लिए कुछ लिखता है तो क्या वह ऊपर ‘ड्राफ्ट फॉर इंडिया पीएम’ लिखेगा. यह घटना दिखाती है कि पाकिस्तान की कूटनीति पर बाहरी दबाव कितना ज्यादा है और वह किस तरह काम करता है.

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भारत की चुप्पी और असली रणनीति

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच भारत की चुप्पी को लेकर थरूर ने अहम बात कही है. उन्होंने साफ किया कि भारत एक जिम्मेदार हिस्सेदार है और कई बार राजनयिक खामोशी भी सबसे बड़ा योगदान होती है. भारत का मुख्य हित युद्ध के नतीजे में है न कि केवल चर्चा की प्रक्रिया का हिस्सा बनने में. खाड़ी देशों में एक करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते हैं और युद्ध के कारण ऊर्जा सप्लाई पर भी गहरा असर पड़ा है. थरूर का मानना है कि युद्ध का खत्म होना ही भारत के हक में है फिर चाहे मध्यस्थता पाकिस्तान करे या कोई और देश. भारत अपनी भूमिका का आकलन खुद करेगा और सही समय पर सही कदम उठाएगा.

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पाकिस्तान की मजबूरी और भारत का हित

थरूर ने यह भी समझाया कि पाकिस्तान की स्थिति भारत से बिल्कुल अलग है क्योंकि उसकी ईरान के साथ करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है. वहां शिया आबादी भी काफी ज्यादा है और युद्ध बढ़ने पर शरणार्थियों का सबसे पहला बोझ पाकिस्तान पर ही आएगा. इसलिए पाकिस्तान की इस खेल में हिस्सेदारी अलग है और भारत का उससे कोई मुकाबला नहीं है. उन्होंने कांग्रेस के उन दावों को खारिज किया जिसमें पाकिस्तान की भूमिका को भारतीय विदेश नीति के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा था. थरूर ने चेतावनी दी कि शून्य की स्थिति खतरनाक होती है लेकिन भारत को अपनी ताकत और सीमाओं को पहचानते हुए ही कदम आगे बढ़ाना चाहिए.

First published on: Apr 11, 2026 11:53 PM

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