‘ट्रोल करना बंद करें’, राहुल गांधी ने किया कृति सैनन का सपोर्ट, बोले- महिलाएं क्या पहनती हैं ये उनकी पसंद
सोशल मीडिया पर अब इस एड को लेकर यूजर्स अलग-अलग गुट में बंट गए हैं. एक वर्ग एक्ट्रेस की ड्रेस को लेकर उन्हें ट्रोल कर रहा है, जबकि कई लोगों ने कृति सैनन का सपोर्ट किया.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Aug 25, 2026 23:01
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Aug 25, 2026 23:01
Share :
कृति सैनन ने भी ट्रोलर्स को जवाब दिया है. (Photo: X)
---विज्ञापन---
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सैनन को अपने एक एड को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है. विवाद ज्यादा बढ़ने के बाद अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कृति सैनन के सपोर्ट में बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कृति सैनन की इंस्टाग्राम स्टोरी को अपने अकाउंट पर शेयर करते हुए महिलाओं की स्वतंत्रता और अपनी पसंद से जीवन जीने के अधिकार की बात कही.
राहुल गांधी ने लिखा, ‘महिलाएं क्या पहनती हैं, क्या करती हैं और कहां जाती हैं, यह उनकी पसंद है. महिलाओं को अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने के लिए ट्रोल करना बंद करें.’ राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के साथ ‘स्मैश द पैट्रिआर्की’ (पितृसत्ता) खत्म करने का हैशटैग भी लगाया.
दरअसल, आभूषण ब्रांड ‘जीवा’ के रक्षाबंधन से जुड़े एक एड में कृति सैनन नजर आई थीं. विज्ञापन में एक्ट्रेस ने भाई का किरदार निभा रहे एक लड़के को राखी बांधी. इस दौरान उन्होंने ऑफ-व्हाइट रंग का इंडो-वेस्टर्न आउटफिट पहना है, जिसमें ब्रालेट स्टाइल ब्लाउज, ड्रेप्ड स्कर्ट और केप शामिल था. सोशल मीडिया पर अब इस एड को लेकर यूजर्स अलग-अलग गुट में बंट गए हैं. एक वर्ग एक्ट्रेस की ड्रेस को लेकर उन्हें ट्रोल कर रहा है, जबकि कई लोगों ने कृति सैनन का सपोर्ट किया.
---विज्ञापन---
कृति सैनन ने भी ट्रोलर्स को दिया जवाब
खुद कृति सैनन ने भी ट्रोलर्स को जवाब दिया है. उन्होंने अपनी स्टोरी में लिखा, ‘संस्कृति कपड़ों में नहीं, दिल में होती है, कपड़ों की नेकलाइन में नहीं.’ उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं को यह बताना आखिर कब बंद किया जाएगा कि उन्हें क्या पहनना चाहिए. कृति सैनन ने कहा कि समय के साथ पारंपरिक फैशन में बदलाव आया है, लेकिन आज भी महिलाओं के अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान को उनके कपड़ों के आधार पर आंकने की कोशिश की जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि त्योहारों का महत्व सिर्फ पहनावे में नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी भावनाओं और परंपराओं में होता है.