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देश

‘धैर्य-निष्पक्षता से सदन चलाया…’, पीएम मोदी ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर की तारीफ

लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पत्र लिखकर सदन के संचालन में दिखाए गए धैर्य, संतुलन और निष्पक्षता की सराहना की. पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन असहमति और असम्मान के बीच फर्क समझना बेहद जरूरी है.

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Written By: Kumar Gaurav Updated: Mar 15, 2026 23:43
PM Modi Writes Letter to Lok Sabha Speaker Om Birla
Credit: Social Media

लोकसभा में हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव और उस पर हुई लंबी बहस के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पत्र लिखकर संसद की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं पर जोर दिया है. दरअसल, विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए नोटिस दिया था और उन पर सदन के संचालन को लेकर लगातार आरोप लगाए थे. इस प्रस्ताव पर लोकसभा में करीब 12–13 घंटे तक चर्चा चली. चर्चा के बाद सदन में ध्वनि मत से प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया और लोकसभा अध्यक्ष अपने पद पर बने रहे. इसी घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उनके धैर्य और सदन के संचालन की सराहना की.

पत्र में पीएम ने क्या लिखा?

प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि लोकसभा में आपके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पराजित हो गया, जिससे स्पष्ट है कि सदन ने इस राजनीतिक कदम को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के बाद आपने सदन में जो वक्तव्य दिया, उसे उन्होंने ध्यान से सुना और उसमें संसदीय इतिहास, अध्यक्ष के दायित्व और नियमों की सर्वोच्चता का जिस संतुलन और स्पष्टता से उल्लेख किया गया, वो अत्यंत प्रभावशाली था. पीएम ने पत्र में आगे लिखा कि संसद का मूल स्वभाव संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का है और सदन में उठने वाली हर आवाज देश के करोड़ों नागरिकों की आवाज होती है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं और विचारों की विविधता ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है, लेकिन असहमति और असम्मान के बीच अंतर होना जरूरी है. उन्होंने ये भी कहा कि कभी-कभी राजनीतिक असहमति संसदीय मर्यादा के प्रति अनादर में बदलती दिखाई देती है, जो चिंता का विषय है.

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पीएम मोदी ने की ओम बिरला की तारीफ

प्रधानमंत्री ने लिखा कि ऐसे समय में लोकसभा अध्यक्ष का पद एक कठिन परीक्षा से गुजरता है, लेकिन ओम बिरला वे धैर्य, संतुलन और निष्पक्षता के साथ इन परिस्थितियों का सामना किया है. उन्होंने ये भी कहा कि संसद एक ऐसा मंच है जहां हर सांसद को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए और आपके कार्यकाल में अधिक से अधिक सांसदों को बोलने का मौका देने का प्रयास किया गया है, चाहे वे नए सांसद हों, युवा हों या महिला सांसद हों.पत्र में प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि लोकतंत्र का अर्थ यही है कि अवसर कुछ लोगों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के हर वर्ग की आवाज संसद तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद आपने लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने का प्रयास किया है. प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में ये भी कहा कि इतने बड़े राष्ट्रीय दायित्वों के बीच भी ओम बिरला ने अपने संसदीय क्षेत्र के विकास को नजरअंदाज नहीं किया और कोटा क्षेत्र में कई विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है. उन्होंने राष्ट्रीय जिम्मेदारियों और क्षेत्रीय दायित्वों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए भी उनकी सराहना की.

ओम बिरला ने जताया पीएम का आभार

प्रधानमंत्री के इस पत्र के जवाब में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी पत्र लिखकर उनका आभार व्यक्त किया. अपने जवाब में उन्होंने लिखा कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति प्रधानमंत्री का हमेशा अटूट विश्वास रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सदैव संसद की मूल प्रकृति संवाद, तर्क और विचार-विमर्श में गहरा विश्वास रखते हैं और सदन में उठने वाली हर आवाज को करोड़ों भारतीय नागरिकों की आवाज के रूप में सम्मान देते हैं. ओम बिरला ने अपने पत्र में आगे लिखा कि प्रधानमंत्री हमेशा संसदीय कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और सदन में उठाए गए हर मुद्दे का समाधान निकालने का प्रयास करते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानमंडलों और स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा और लोकतंत्र के नैतिक आधार को और मजबूत करेगा.

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First published on: Mar 15, 2026 11:43 PM

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