झारखंड प्रोटेस्ट में 'पेंटबॉल गन' को लोगों ने समझा पैलेट गन, जानिए दोनों में क्या है अंतर और कौन ज्यादा खतरनाक?

Jharkhand Student Movement: झारखंड में JPSC, JSSC CGL समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और घूसखोरी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है. सोमवार को छात्रों ने शांतिपूर्वक विधानसभा का घेराव करने के लिए मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने रोकने की भी पूरी कोशिश की.

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झारखंड में जारी छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय उग्र हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने रांची स्थित विधानसभा तक पैदल मार्च किया. इस दौरान छात्रों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कई स्तरों की बैरिकेडिंग की थी, लेकिन प्रदर्शनकारी एक-एक कर सभी रुकावटों को पार करते गए. हालांकि जब तक छात्र विधानसभा के बेहद करीब नहीं पहुंचे, तब तक पुलिस ने उन पर हिंसक बल का प्रयोग नहीं किया. लेकिन कई छात्र विधानसभा के परिसर तक पहुंच गए, जिसके बाद पुलिस द्वारा लाठी चार्ज की खबरें भी सामने आईं. अब इस प्रोटेस्ट में भी पैलेट गन को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

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क्या प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल हुई पैलेट गन?

गौरतलब है कि झारखंड में JPSC, JSSC CGL समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और घूसखोरी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है. सोमवार को छात्रों ने शांतिपूर्वक विधानसभा का घेराव करने के लिए मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने रोकने की भी पूरी कोशिश की. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें पुलिस की ओर से इस्तेमाल की जा रही कुछ बंदूकों को पैलेट गन बताया गया. हालांकि, पैलेट गन के दावों पर रांची पुलिस बताया कि वीडियो में दिखाई दे रही बंदूक पैलेट गन नहीं, बल्कि पेंटबॉल गन है.

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पैलेट गन और पेंटबॉल गन में क्या होता है अंतर?

कई लोग पेंटबॉल गन को पैलेट गन समझने की गलती करते हैं, लेकिन दोनों में काफी अंतर है. पेंटबॉल गन का इस्तेमाल किसी हथियार के रूप में नहीं, बल्कि पेंटबॉल गेम में होता है. इस खेल में खिलाड़ियों के बीच एक तरह का नकली युद्धाभ्यास कराया जाता है. खिलाड़ी एक-दूसरे पर रंग से भरी छोटी गेंदें फायर करते हैं. गेंद शरीर या कपड़ों से टकराते ही फट जाती है और उस जगह रंग छोड़ देती है. इससे गंभीर रूप से हताहत होने का खतरा तो नहीं होता, लेकिन नाजुक अंगों खासतौर से आंख में गेंद लगने से नुकसान चिंताजन हो सकता है.

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क्या होता है पैलेट गन?

वहीं, दूसरी ओर पैलेट गन की बात करें तो इस बंदूक का इस्तेमाल भीड़ को तितर-बितर करने के लिए किया जाता है. पैलेट गन से दागे जाने वाले छर्रे गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं और आंखों समेत शरीर के संवेदनशील हिस्सों को नुकसान होने का खतरा रहता है. दिल्ली में संसद मार्च के दौरान छात्रों और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाए कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था. पैलेट गन को कम से कम 500 मीटर दूर से चलाना अनिवार्य है, ज्यादा करीब से ये बंदूक गंभीर चोट पहुंचा सकती है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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