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पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, असम केस में मिली सशर्त अग्रिम जमानत

Pawan Khera Bail: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर बयान देने के मामले में कोर्ट ने उनकी आजादी का सम्मान करते हुए अग्रिम जमानत मंजूर की, लेकिन साथ ही पुलिस जांच में शामिल होने जैसी कड़ी शर्तें भी रखी हैं. पढ़ें पूरा फैसला.

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Edited By : Vijay Jain Updated: May 1, 2026 12:43
Pawan Khera Bail, Supreme Court Verdict, Himanta Biswa Sarma, Relief for Congress Leader

Pawan Khera Bail : कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम पुलिस द्वारा दर्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने न केवल उन्हें अग्रिम जमानत दी, बल्कि इस पूरे मामले को प्रथम दृष्टया ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ करार दिया है. जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने स्पष्ट किया कि खेड़ा पर लगे आरोप राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम लगते हैं, जिसके लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी भी व्यक्ति की आजादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है, इसे आसानी से छीना नहीं जा सकता. कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि अगर क्राइम ब्रांच खेड़ा को गिरफ्तार करती है तो उन्हें तुरंत अग्रिम जमानत पर रिहा कर दिया जाए.

क्या था पूरा विवाद?

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुईंया से जुड़ा है. पवन खेड़ा ने उन पर आरोप लगाया था कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्ति है. इन्हीं आरोपों के बाद असम में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. खेड़ा पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट और निचली अदालतों में गए थे, लेकिन वहां राहत न मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

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हाईकोर्ट की टिप्पणी पर जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गुवाहाटी हाईकोर्ट के पिछले आदेश पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा बीएनएस (BNS) की धारा 339 का हवाला देकर की गई टिप्पणी गलत थी, क्योंकि एफआईआर में ऐसे किसी आरोप का जिक्र ही नहीं था. बेंच ने सख्त लहजे में कहा कि हाईकोर्ट सिर्फ एडवोकेट जनरल के मौखिक बयानों के आधार पर ऐसी टिप्पणियां नहीं कर सकता.

हिमंता बिस्वा सरमा के बयानों का जिक्र

अदालत ने अपने आदेश में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा पवन खेड़ा के खिलाफ दिए गए बयानों को भी रिकॉर्ड पर लिया है. कोर्ट ने इन बयानों को आधार मानते हुए माना कि यह पूरा मामला आपसी खींचतान से प्रभावित हो सकता है. अदालत ने कहा कि आरोपों की सच्चाई क्या है, इसकी जांच मुकदमे (ट्रायल) के दौरान की जा सकती है, लेकिन इसके लिए किसी की व्यक्तिगत आजादी को छीनना सही नहीं है.

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किन शर्तों पर मिली राहत?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को तुरंत बेल पर रिहा किया जाए, लेकिन उन्हें निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा:

  • जांच में सहयोग: उन्हें पुलिस की जांच में पूरी मदद करनी होगी.
  • थाने में हाजिरी: जब भी पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए बुलाएगी, उन्हें पेश होना पड़ेगा.
  • विदेश यात्रा पर रोक : वे बिना कोर्ट की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे.
  • सबूतों की सुरक्षा : वे किसी भी तरह से केस के सबूतों या गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत देने के उद्देश्य से हैं और इनका मुख्य केस के अंतिम फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ट्रायल कोर्ट कानून के हिसाब से अपनी कार्यवाही जारी रखेगा.प्रभावित नहीं करेंगी और ट्रायल कोर्ट स्वतंत्र रूप से अपनी कार्रवाई करेगा.

First published on: May 01, 2026 12:15 PM

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