'पत्नी से बात न करना क्रूरता नहीं', सुसाइड केस में सुप्रीम कोर्ट ने पलटा HC का फैसला

Supreme Court Judgement: सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या के एक मामले में पति को बरी करते हुए बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि पत्नी से 13 दिनों तक बातचीत न करना क्रूरता के दायरे में नहीं आता. वैवाहिक जीवन में छोटी-मोटी लड़ाई और कभी-कभार की चुप्पी सामान्य बात है.

Supreme Court big decision on religious conversion
विज्ञापन

Supreme Court Judgement: सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों और आत्महत्या के उकसावे से जुड़े एक मामले में बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने एक पति को बरी करते हुए साफ कहा कि पत्नी से कुछ दिनों तक बातचीत बंद कर देना क्रूरता नहीं माना जा सकता. शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि वैवाहिक जीवन में मतभेद होना और कभी-कभार की चुप्पी एक सामान्य बात है.

क्या था पूरा मामला?

यह मामला जयेश कन्नन और उनकी पत्नी संगीता से जुड़ा है. जयेश मस्कट (ओमान) में एक इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे. दोनों की शादी 2 नवंबर 2014 को हुई थी. शादी के कुछ ही दिन बाद 29 नवंबर 2014 को जयेश मस्कट चले गए. इसके बाद संगीता अपने मायके आ गई और 31 जनवरी 2015 को उसने वहां आत्महत्या कर ली.

विज्ञापन

अभियोजन पक्ष का आरोप था कि मायके जाने के बाद जयेश ने संगीता से फोन पर बात करना बंद कर दिया था. लगातार 13 दिनों तक बात न होने के कारण वह मानसिक रूप से परेशान हो गई और उसने आत्मघाती कदम उठा लिया. इस आधार पर निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने जयेश को आईपीसी की धारा 498A (महिला के प्रति क्रूरता) के तहत दोषी मानते हुए 3 साल की कठोर कैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसे मद्रास हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था.

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया बरी?

मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा. अदालत ने फैसले में निम्नलिखित मुख्य बातें रेखांकित कीं:

  • कॉल रिकॉर्ड का न होना: अभियोजन पक्ष ने केवल मौखिक गवाही और व्हाट्सएप मैसेज न आने के रिकॉर्ड पेश किए थे. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ व्हाट्सएप पर मैसेज न आना यह साबित नहीं करता कि बात नहीं हुई, क्योंकि संपर्क सामान्य फोन कॉल से भी हो सकता था. पति का कहना था कि पत्नी का फोन खराब होने के कारण उसने ससुर से बात की थी, जिसे झुठलाने के लिए कोई कॉल रिकॉर्ड नहीं दिया गया.
  • साथ रहने के दौरान कोई प्रताड़ना नहीं: कोर्ट ने नोट किया कि जब तक यह जोड़ा भारत में साथ रहा (2 नवंबर से 29 नवंबर 2014 तक), तब तक क्रूरता या उत्पीड़न का कोई आरोप न तो लगाया गया और न ही साबित हुआ.
  • क्रूरता की परिभाषा: ‘मंजू राम कलिता बनाम असम राज्य’ मामले के पुराने फैसले का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि क्रूरता को लगातार, बार-बार या कम समय के अंतराल में साबित किया जाना चाहिए. छोटी-मोटी लड़ाइयों या कुछ दिनों की चुप्पी को आपराधिक क्रूरता नहीं माना जा सकता.

अदालत ने माना कि महज 13 दिन बात न होने को आधार बनाकर पति को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता और जयेश को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ