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कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अगुवाई में विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति मंगलवार को श्रीनगर पहुंची. यह समिति जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चार दिन के दौरे पर है. अधिकारियों और समिति के सदस्यों ने बताया कि इस दौरे का मकसद रणनीतिक सीमा सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करना है.

कमेटी के सदस्य पहले जम्मू गए थे, अब श्रीनगर पहुंचे हैं. इसके बाद यह 24-25 जून को कारगिल और लेह जाएंगे. इस दौरे के दौरान सीमा प्रबंधन और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा हालात की सीधी जानकारी ली जाएगी. इसके अलावा इस दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों और सीमा के पास रहने वाले लोगों से बातचीत करके जानकारी हासिल की जाएगी.

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शशि थरूर ने बताया, ‘इस दौरे का मकसद हमारी सीमाओं पर जमीनी हालात का जायजा लेना और भारत के द्विपक्षीय संबंधों में हालिया उन बदलावों को बेहतर ढंग से समझना है, जिनका असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है.’

समिति के सदस्यों ने मंगलवार को श्रीनगर में सेना और अर्धसैनिक बलों के कमांडरों और स्थानीय अधिकारियों के साथ विस्तार से बातचीत की और वे दोनों केंद्र-शासित प्रदेशों में समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे.

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कमेटी के दौरे के मुख्य एजेंडे में क्या-क्या है?

  • लाइन ऑफ कंट्रोल और इंटरनेशनल बॉर्डर पर सीमा-पार आतंकवाद और सीमा प्रबंधन.
  • भारत-चीन संबंध और पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर सुरक्षा की स्थिति.
  • सिंधु जल संधि को निलंबित करने और इसके व्यापक क्षेत्रीय असर समेत द्विपक्षीय मुद्दे.
  • पश्चिम एशिया के संघर्ष का क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापार मार्गों पर असर, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट के संभावित बंद होने और भारत पर इसके असर को लेकर चिंताएं शामिल हैं.

कांग्रेस सांसद और कमेटी के सदस्य राजीव शुक्ला ने बताया कि डेलिगेशन सेना के शीर्ष अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर चीन और पाकिस्तान के साथ बदलते द्विपक्षीय संबंधों का आकलन करेंगे. उन्होंने कहा, ‘हम पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उसके असर की भी समीक्षा करेंगे. इसमें अमेरिका-ईरान के बीच किसी भी समझौते और होर्मुज स्ट्रेट में बंद होने के नतीजे भी शामिल हैं.’

अधिकारियों ने बताया कि नई दिल्ली से रवाना होने से पहले, कमेटी को विदेश सचिव विक्रम मिसरी से चीन-भारत संबंधों और पाकिस्तान पर भारत के राजनयिक रुख के बारे में जानकारी मिली. यह दौरा पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ झड़प और LoC पर लगातार सीमा-पार गोलीबारी के बीच हाल के वर्षों में उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर बढ़े तनाव के बाद हो रहा है.

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सैन्य और प्रशासनिक चर्चाओं के अलावा, यह प्रतिनिधिमंडल सीमावर्ती इलाकों के निवासियों से भी बातचीत करेगा ताकि संसदीय निगरानी और नीतिगत सुझावों में स्थानीय लोगों की राय को भी शामिल किया जा सके. उम्मीद है कि समिति की रिपोर्ट और सुझावों का इस्तेमाल भविष्य में विदेश मामलों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संसदीय बहसों और नीतिगत चर्चाओं में किया जाएगा.

समिति की जमीनी स्तर की जानकारियों को एक रिपोर्ट बनाकर संसद में पेश किया जाएगा, जिससे जटिल क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच विदेश मामलों पर संसदीय निगरानी को दिशा मिलेगी.

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First published on: Jun 23, 2026 04:59 PM

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