पाकिस्तान एयरस्पेस बंद हुआ तो कहां से गुजरेंगे भारतीय विमान, जानें क्या रहेगा रूट?

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ डिप्लोमैटिक स्ट्राइक की। पाकिस्तान ने भी इसका जवाब देते हुए एयरस्पेस बंद करने का फैसला लिया। जानें अब भारतीय विमान का क्या होगा रूट?

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जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। मोदी सरकार की डिप्टोमैटिक स्ट्राइक के खिलाफ पाकिस्तान ने भी कदम उठाया और भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। हालांकि, पहलगाम अटैक के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब से वापस लौटते समय पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया था। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने पर अब कहां से गुजरेंगे भारतीय विमान?

अगर कोई भारतीय विमान सऊदी अरब के लिए उड़ान भरता है तो पाकिस्तान के रास्ते जल्दी पहुंच जाता है। अब पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने के बाद अब भारतीय विमान को दूसरे रूट से होकर सऊदी अरब जाना पड़ेगा, जोकि काफी खर्चीला हो सकता है। दूसरा विकल्प- अब भारतीय विमान मुंबई से अरब सागर होते हुए सऊदी अरब पहुंचेगा।

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ये हो सकते हैं रूट्स

अगर अफगानिस्तान के काबुल से दिल्ली के लिए भारतीय विमान उड़ान भरता है तो वह पाकिस्तान के रास्ते से नहीं जाएगा, बल्कि उसे ईरान से होकर अरब सागर होते हुए दिल्ली का रास्ता लेना पड़ेगा। इससे एयरलाइंस के खर्चे बढ़ जाएंगे और उड़ानों का भी समय बढ़ जाएगा। साथ ही भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों की दूरी बढ़कर 913 किलोमीटर हो जाएगी और समय भी दो घंटे बढ़ जाएगा।

पीएम मोदी ने नहीं किया था पाकिस्तान एयरस्पेस का इस्तेमाल

आपको बता दें कि 2019 के पुलवामा हमले के समय में भी भारत की ओर से पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था। हालांकि, बाद में दोनों देशों के बीच हवाई क्षेत्रों में आवाजाही शुरू हो गई थी। इस बार भी ऐसा ही हुआ। शहबाज शरीफ सरकार द्वारा एयरस्पेस बंद करने से पहले ही पीएम मोदी ने सऊदी अरब से लौटते समय पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया था। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भारत काफी गुस्से में है और पाकिस्तान के खिलाफ कोई एक्शन ले सकता है।

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लंबे रूट से जाएंगे भारतीय विमान

पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र बंद होने से एयर इंडिया जैसी एयरलाइनों को अब उत्तरी अमेरिका, यूरोप, यूके. और मध्य पूर्व की उड़ानों के लिए लंबे मार्ग लेने पड़ेंगे। इन लंबे मार्गों का मतलब है कि विमानों को अधिक ईंधन की आवश्यकता होगी, क्रू मेंबर को अधिक घंटे तक काम करने पड़ेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इन अतिरिक्त लागतों को पूरा करने के लिए एयरलाइनें टिकट की कीमतें बढ़ा सकती हैं। यात्रियों को संभावित देरी या किराए में बढ़ोतरी के बारे में जानकारी रखनी चाहिए।

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