जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने बड़ा बयान दिया है. न्यूज़ 24 से खास बातचीत में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन युवाओं का जोश था और उनकी मांग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की थी. उन्होंने कहा कि उन्हें छात्रों की मांगों से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन आंदोलन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर उन्हें ऐतराज था. ठाकुर ने शिक्षा और स्वास्थ्य को पूरी तरह निशुल्क करने की पैरवी की, वहीं मंदिरों के बेहतर प्रबंधन के लिए सनातन बोर्ड बनाने की मांग भी दोहराई.
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ठाकुर ने क्या कहा?
देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि अगर सरकार दूसरी मुफ्त योजनाओं की जगह स्वास्थ्य और शिक्षा को पूरी तरह निशुल्क कर दे तो गरीबों को बेहतर इलाज और शिक्षा मिलेगी, जिससे पेपर लीक जैसी गड़बड़ी पर भी काफी हद तक रोक लग सकती है.
देवकीनंदन ठाकुर ने आंदोलन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर भी नाराज़गी जताई. उन्होंने कहा कि अन्ना हज़ारे ने भी 22 बड़े आंदोलन किए, लेकिन कभी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया. उनके मुताबिक हिंसा केवल शारीरिक नहीं होती, शब्दों की हिंसा भी उतनी ही पीड़ादायक होती है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर भी की टिप्पणी
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर भी देवकीनंदन ठाकुर ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि बड़े मंदिरों के संचालन के लिए सनातन बोर्ड बनाया जाना चाहिए और उसमें केवल धर्माचार्यों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. उनका कहना था कि धर्म से जुड़े संस्थानों का संचालन धर्माचार्यों के हाथ में होगा, तभी ऐसी घटनाओं पर रोक लग सकेगी. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से सभी बड़े मंदिरों में अधिकारियों को बैठा दिया गया, ऐसे में चंदा चोरी नहीं होगा तो और क्या होना था.
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(Input By: KJ Srivatsan)