भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने सोमवार को कहा कि देश में चीनी की कोई किल्लत नहीं है और खुदरा बाजार में इसकी कीमतें आने वाले दिनों में घटने की उम्मीद है. इस्मा के अध्यक्ष नीरज शिरगावकर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीनी की कीमतों में हाल में आई तेजी के पीछे कई कारण हैं. कीमतें बढ़ने की उम्मीद में कारोबारियों और थोक उपभोक्ताओं की तरफ से की गई खरीदारी और खराब मौसम के कारण उत्पादन में कमी इसके प्रमुख कारण हैं.
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इस्मा अध्यक्ष ने क्या कहा?
इसके साथ ही, शिरगांवकर ने साफतौर से कहा कि कृत्रिम किल्लत पैदा करने या मिलों के स्तर पर कीमतें बढ़ाने के पीछे चीनी मिलें शामिल नहीं हैं. पिछले कुछ दिनों में चीनी के खुदरा दाम बहुत तेजी से बढ़े हैं जिसके बाद सरकार के स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार के 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने के बाद चीनी की कीमतों में नरमी आनी शुरू हो गई है. शिरगांवकर ने संवाददाताओं के सवाल पर कहा कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि सितंबर के आखिर में मौजूदा चीनी मार्केटिंग सेशन खत्म होने पर 35 लाख टन का भंडार रहेगा. इस्मा अध्यक्ष ने कहा कि चीनी मिलों का अगला पेराई सत्र करीब 15 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा और अक्टूबर में करीब 10-12 लाख टन चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि अक्टूबर महीने में चीनी की मांग करीब 24-25 लाख टन रहने का अनुमान है.
चीनी के रेट महंगे होने के क्या कारण हैं?
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्र सरकार की ओर से बताया कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है, लेकिन चीनी महंगी होने के 2 बड़े कारण हैं. एक वजह रेड रॉट बीमारी और दूसरी वजह एल नीनो है. इन दोनों परिस्थितियों के कारण चीनी के उत्पादन में गिरावट आई. भारत ही नहीं दुनियाभर में चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ है. लोगों को ही नहीं, सरकार को भी चीनी के बढ़ते रेटों की चिंता है, इसलिए केंद्र सरकार ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं. भारत को 280 लाख टन चीनी की जरूरत है और पर्याप्त सरप्लस चीनी का स्टॉक है तो ज्यादा समय तक लोगों को महंगाई से नहीं जूझना पड़ेगा.
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