Surendra Koli suicide: देश को हिला देने वाले नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड का मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली अब इस दुनिया में नहीं रहा. शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में उसका शव एक चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला. पुलिस भले ही शुरुआती जांच में इसे पारिवारिक कलह या आत्महत्या मान रही हो, लेकिन निठारी के पीड़ित परिवारों ने इसे सिरे से नकारते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. परिवारों का साफ कहना है कि यह सुसाइड नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या है, ताकि निठारी कांड के बड़े राज हमेशा के लिए दफन हो जाएं.
जेल से रिहा होने के बाद वह भला खुदकुशी क्यों करेगा?
नोएडा में एक पीड़िता के पिता ने कोली की खुदकुशी के दावे पर सीधे सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या का मामला है. पीड़िता के पिता ने साफ लफ्जों में कहा, “क्या उसने सच में आत्महत्या की है या उसे मारा गया है? किसी ने उसे मरवाया है. जेल से रिहा होने के बाद वह भला खुदकुशी क्यों करेगा? वह अपने बच्चों और बुजुर्ग मां के साथ शांति से जीवन जी सकता था. उसे किस बात की चिंता थी? वह चाय की दुकान चलाकर भी अपने परिवार का पेट आराम से पाल सकता था.” पिता का दावा है कि रिहाई के बाद कोली के पास अपनी जिंदगी नए सिरे से जीने का मौका था, ऐसे में उसकी मौत के पीछे कोई गहरी साजिश हो सकती है.
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‘मुझे माफ कर दो, वो गलती से आ गई थी’
उस खौफनाक दौर को याद करते हुए पीड़िता के पिता ने बताया कि जब उनका आमना-सामना कोली से हुआ था, तब उसने अपना गुनाह कबूल किया था. उन्होंने कहा, “मैंने उससे पूछा था कि तूने मेरी बच्ची को कैसे बहलाया? उसके साथ क्या किया? तब उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा था-‘मुझे माफ कर दो, वो गलती से आ गई थी, गलती से सब हो गया.’ सच तो यह है कि बच्चों को फूल या खिलौने दिखा दो तो चाहे बच्चा किसी अमीर का हो या गरीब का, वह दौड़कर आ जाता है. वह भी बच्चों को फूल और खिलौने दिखाकर फंसाता था. वहीं बड़ी उम्र की महिलाओं और पुरुषों को वह काम और मनचाहे पैसों का लालच देकर अपने जाल में खींचता था.”
पीड़ित परिवारों ने उठाए ये 5 बड़े सवाल
- जेल में 6,935 दिन जिंदा रहा, बाहर 310 दिन में क्या हुआ?
- सुरेंद्र कोली ने जेल की कालकोठरी और फांसी के खौफ के बीच 6,935 दिन गुजारे. 13 मामलों में मौत की सजा झेलने के बावजूद उसने कानूनी लड़ाई लड़ी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो शख्स करीब 19 साल तक सलाखों के पीछे मौत से लड़ता रहा, वह रिहाई के महज 310 दिनों के भीतर खुदकुशी कैसे कर सकता है?
- नोएडा से हरिद्वार कैसे और किसके सहारे पहुंचा?
- सुप्रीम कोर्ट से सबूतों के अभाव में बरी होने के बाद कोली अचानक हरिद्वार कैसे पहुंच गया? वहां उसकी चाय की दुकान किसने खुलवाई और उसके पीछे कौन से लोग सक्रिय थे?
- सबूतों की कमी से राहत या सिस्टम की चूक?
- सीबीआई जांच में खामियों और सबूतों के अभाव के चलते कोली को राहत मिली थी. पीड़ितों का कहना है कि इतने जघन्य कांड के बावजूद वह रिहा हुआ, लेकिन क्या उसकी सुरक्षा या गतिविधियों पर किसी की नजर थी?
- क्या राज सामने आने के डर से खत्म किया गया?
- निठारी में अपनी मासूम बेटी को खोने वाले परिवारों का आरोप है कि कोली के सीने में इस हत्याकांड और रसूखदारों से जुड़े कई गहरे राज दफन थे. पीड़ितों को शक है कि कहीं कोई बड़ा सच उजागर न हो जाए, इसलिए उसे रास्ते से हटा दिया गया.
- अचानक सुसाइड या साजिश?
- घटनास्थल से कोई ठोस सुसाइड नोट बरामद नहीं होने की चर्चाओं के बीच, पीड़ितों का सवाल है कि चार दिन पहले दुकान शुरू करने वाला शख्स अचानक इतना बड़ा कदम कैसे उठा सकता है?
सुरेंद्र कोली की मौत को आत्महत्या मान रही पुलिस
हरिद्वार के सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को सुबह सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर जान दे दी है. जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शिनाख्त की गई, तो मृतक की पहचान निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली के रूप में हुई. सीओ सिटी के अनुसार, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में रह रहा था. गुजारे के लिए वह यहां किराए पर एक चाय की दुकान चला रहा था. अचानक उसके इस तरह फंदे से लटके मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.
फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, पोस्टमार्टम पैनल से होगा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारियों के साथ फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची. जांच टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य और सबूत जुटाए हैं. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भर दिया है. अधिकारियों का कहना है कि मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के एक विशेष पैनल द्वारा कराया जाएगा. फिलहाल प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का ही नजर आ रहा है. मौके से मिले सबूतों व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की जानकारी साझा की जाएगी.
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