---विज्ञापन---

देश angle-right

भीषण भूकंप-तूफान का खतरा टला; 44000KM की रफ्तार से आया था Asteroid, पढ़ें नासा का अपडेट

Asteroid Earth Collision Update: धरती पर मंडराई आफत टल गई है। एक विशालकाय एस्ट्रॉयड धरती की तरफ आया था, जो आराम से गुजर गया। वैज्ञानिकों ने सौर तूफान की चपेट में आकर इसके धरती से टकराने की संभावना जताई थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

---खबर नीचे जारी है---

NASA Update on Asteroid 2007 JX2: आज धरती का विनाश होने से बच गया। आज धरती पर जलजला आ सकता है। भीषण तूफान और भूकंप आने का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन आफत टल गई। क्योंकि आज भारतीय समयानुसार सुबह करीब पौने 5 बजे धरती के पास से एक विशालकाय एस्ट्रॉयड गुजरा। हालांकि इसका धरती से टकराव नहीं हुआ, लेकिन जब यह धरती के पास से गुजरा तो वैज्ञानिकों ने धरती में कंपन महसूस किया।

अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने इस एस्ट्रॉयड पर नजर रखी। एजेंसी की कैलिफोर्निया स्थित जेट प्रपल्शन लैब (JPL) में बैठे वैज्ञानिकों ने इस एस्ट्रॉयड से जुड़ा डाटा कलेक्ट किया। वैज्ञानिकों ने 2007 JX2 को लेकर अलर्ट जारी किया था कि आज यह धरती के काफी करीब से गुजरेगा और सौर तूफान की चपेट में आने से इसके धरती से टकराने का खतरा है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। एस्ट्रॉयड धरती के पास से गुजरा और अंतरिक्ष के अंधेरे में गुम हो गया।

---खबर नीचे जारी है---

यह भी पढ़ें:16.5 करोड़ साल…डायनासोर, कीड़े-मकौड़े और मछलियां? वैज्ञानिकों ने तलाशा तीनों का चौंकाने वाला कनेक्शन

धरती से 55 लाख किलोमीटर दूर था एस्ट्रॉयड

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एस्ट्रॉयड का नाम 447755 (2007 JX2) है। 1300 फीट व्यास वाला यह एस्ट्रॉयड स्टेडियम जितना विशाल था, जो अंतरिक्ष में 44000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से घूम रहा था। पृथ्वी से इस एस्ट्रॉयड की दूरी 5.5 मिलियन (55 लाख) किलोमीटर थी, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से 14 गुना अधिक है। हालांकि 5.5 मिलियन किलोमीटर काफी करीब है, लेकिन अंतरिक्ष के दुनिया में यह काफी दूर है। हालांकि पृथ्वी के लिए यह एस्ट्रॉयड कोई खतरा नहीं था, फिर भी नासा के वैज्ञानिक एस्ट्रॉयड को लेकर अलर्ट रहे।

---खबर नीचे जारी है---

क्योंकि अगर यह सौर तूफान की चपेट में आता तो धरती की तरफ मुड़ सकता था। एस्ट्रॉयड की स्पीड, दिशा और दूरी की निगरानी करने के लिए नासा स्पेस एजेंसी एस्ट्रॉयड वॉच डैशबोर्ड का उपयोग करती है। यह सिस्टम वैज्ञानिकों को यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि वे किसी भी संभावित जोखिम से पहले से वाकिफ हैं। इसमें एक DART (डबल एस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट) मिशन भी है, जिसके जरिए जरूरत पड़ने पर किसी एस्ट्रॉयड को उसके रास्ते से हटाया जा सकता है।

यह भी पढ़ें:अंतरिक्ष से क्यों नहीं लौटा कुत्ता? जानें कब भेजा गया था और स्पेस में उसके साथ क्या हुआ‌?

---खबर नीचे जारी है---

First published on: Dec 03, 2024 09:43 AM

End of Article

About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं एमफिल कोर्स किया है। 13 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी हूं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के माल‍िकाना हक वाले News 24 हिंदी डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हूं। चीफ सब एडिटर की भूमिका निभाते हुए यहां की कोर टीम का हिस्सा हूं। नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम, फीचर आदि टॉपिक कवर करती हूं। घूमने, खाने और शॉपिंग की शौकीन खुशबू को नए ट्रेंड, नई जगह और ऐडवेंचर की तलाश रहती है।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola