16.5 करोड़ साल...डायनासोर, कीड़े-मकौड़े और मछलियां? वैज्ञानिकों ने तलाशा तीनों का चौंकाने वाला कनेक्शन

Scientific Research On Dinosaur: पोलैंड के वैज्ञानिकों ने डायनासोर के जीवन पर एक रिसर्च की है, जिसमें उनके खान-पान को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हालांकि रिसर्च को लेकर वैज्ञानिकों में मतभेद है, लेकिन डायनासोर के जीवन से जुड़ी इस रिसर्च को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Dinosaur

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Scientific Research About Dinosaur: आज से 6.5 करोड़ साल पहले धरती पर डायनासोर थे और वे धरती पर करीब 16.5 करोड़ (165 मिलियन) साल रहे। साढ़े 6 करोड़ साल पर धरती से एक एस्ट्रॉयड टकराया और डायनासोर विलुप्त हो गए। अब डायनासोर को लेकर वैज्ञानिकों ने एक और रिसर्च की है। इस रिसर्च को करने के लिए पोलैंड के वैज्ञानिकों ने डायनासोर के जीवाश्म मल और उल्टी के नमूनों का इस्तेमाल किया।

इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि लाखों साल पहले डायनासोर पृथ्वी पर कैसे हावी हुए? हालांकि शोधकर्ता निश्चित नहीं हैं कि 3 करोड़ सालों के दौरान डायनासोर अस्तित्व में आए थे। उप्साला विश्वविद्यालय के रिसर्चर मार्टिन क्वार्नस्ट्रॉम ने गत बुधवार को प्रकाशित नेचर जर्नल में इस रिसर्च पर छपे आर्टिकल में यह जानकारी दी।

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डायनासोर मौसम के अनुकूल खुद को ढाल लेते थे

नेचर जर्नल में बुधवार को प्रकाशित रिसर्च में बताया गया कि वैज्ञानिकों ने डायनासोर के मल और उल्टी का विश्लेषण करके पता लगाया कि 20 करोड़ साल पहले कौन-किसे खा रहा था? पहले डायनासोर खाने वाले थे और वे बहुत जीवट जानवर थे, इसलिए वे कुछ भी खा सकते थे। उनके भोजन में कीड़े, मछली और पौधे शामिल थे। जब जलवायु परिस्थितियां बदलीं तो वे तेजी से अनुकूलन करने लगे।

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वे खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेते थे। पौधे खाने वाले डायनासोर उस समय के अन्य शाकाहारियों की तुलना में कई प्रकार की हरी सब्जियां खाते थे, इसलिए जब हवा में नमी पैदा हुई तो पौधों की नई प्रजातियों का जन्म हुआ। चूंकि रिसर्च के निष्कर्ष पोलिश जीवाश्मों तक ही सीमित थे, इसलिए क्वार्नस्ट्रॉम ने कहा कि वह यह देखना चाहेंगे कि क्या उनकी रिसर्च के निष्कर्ष दुनियाभर के जीवाश्म रिकॉर्ड के खिलाफ हैं?

डायनासोर सब्जियों के साथ कीड़े-मछलियां खाते थे

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एरलैंगेन-नूरेमबर्ग विश्वविद्यालय की जीवाश्म जीवविज्ञानी एम्मा डन ने कहा कि वैज्ञानिकों के लिए धरती पर रहे जानवरों को समझने के लिए प्राचीन मल पदार्थ का अध्ययन करना असामान्य नहीं है, लेकिन जीवाश्म मल, पत्थर के धब्बों या टुकड़ों जैसा दिख सकता है। वे हमेशा उस जानवर के जीवाश्मों के पास नहीं पाए जाते हैं, जिसने उन्हें बनाया था, इसलिए वैज्ञानिकों के लिए यह जानना मुश्किल हो जाता है कि वे कहां से आए हैं? इस अध्ययन में शोधकर्ताओं को मल के भीतर मछली के शल्क, कीटों के टुकड़े और हड्डियों के टुकड़े मिले। इन्हीं का अध्ययन वैज्ञानिकों ने किया।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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