युद्ध के बदलते माहौल के बीच भारत और उज्बेकिस्तान की सेनाएं एक बड़ा साझा युद्ध अभ्यास कर रही है. यह युद्धाभ्यास उज्बेकिस्तान के नामांगन स्थित गुरुमसराय ट्रेनिंग एरिया में चल रहा है जिसमें दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के साथ अपने युद्ध कौशल को साझा कर रही है.
आपको बता दे कि इस अभ्यास का मुख्य मकसद भविस्य के युद्ध के लिए खुद को तैयार करने के साथ ही आतंकवाद के खिलाफ बहुत प्रभावी कार्रवाई करना है.
युद्ध के दौरान होने वाली कार्यवाही, आतंकवाद के खिलाफ सेना ग्राउंड 0 पर किस तरह से ऑपेरशन करती है ठीक उसी तरह का माहौल बनाकर वार एक्सरसाइज किया जा रहा है.
इसमें चौतरफा घेराबंदी, छापेमारी और बंधकों को सुरक्षित निकालने की सटीक टेक्निक की प्रैक्टिस की जा रही है. भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ी में सेना के 45 जवान शामिल हैं. जिनमें से अधिकांश ‘महार रेजिमेंट’ की एक बटालियन से हैं. साथ ही भारतीय वायु सेना के 15 जवान शामिल हैं. उज्बेकिस्तान की टुकड़ी में भी सेना और वायु सेना के कुल 60 जवान शामिल हैं.
अभ्यास के दौरान, दोनों टुकड़ियों के सैनिकों ने सामरिक तालमेल और परिचालन को मजबूत करने के लिए क्षेत्र का परिचय, रणनीति, तकनीकों और प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान, दोनों हाथों से पिस्तौल फायरिंग, रिफ्लेक्स शूटिंग, आरपीजी फायरिंग, निहत्थे युद्ध, संगीन लड़ाई, यूएवी अनुप्रयोग, शहरी इलाके में फायर एंड मूव ड्रिल, कॉम्बैट कैजुअल्टी इवैक्यूएशन, टोही और निगरानी, हाउस इंटरवेंशन ड्रिल, पर्वतारोहण, रैपलिंग, स्नाइपर प्रशिक्षण और नेविगेशन अभ्यास किया जा रहा है.
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दुस्तलिक एक सालाना युद्धाभ्यास है, जो बारी-बारी से भारत और उज्बेकिस्तान में आयोजित किया जाता है,साल 2025 में दोनों देशों के बीच युद्धाभ्यास ,पुणे के औंध स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में हुआ था. यह अभ्यास दोनों देशों के बीच डिफेंस सेक्टर को और ज्यादा मजबूती देने के लिए किया जाता है.
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