Kumar Gaurav
Read More
---विज्ञापन---
भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से तय नहीं होतीं, बल्कि यह केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स ढांचे, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की लागत और वैश्विक ऊर्जा संकटों के बीच संतुलन का परिणाम हैं.
देश में केंद्र सरकार का एक्साइज ड्यूटी सभी राज्यों में समान रहता है, लेकिन अंतिम खुदरा कीमत राज्य-स्तरीय वैट (VAT) और अन्य सेस के कारण बदल जाती है.
इसी वजह से एक ही ईंधन की कीमत अलग-अलग राज्यों में काफी भिन्न है.
यह भी पढ़ें : 20 May Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, अपनी जेब का हाल देखने के लिए चेक करें पूरी लिस्ट
राज्यवार पेट्रोल कीमतें (₹/लीटर):
रूस-यूक्रेन युद्ध (2022) और 2026 के हॉर्मुज़ संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें कई बार $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचीं.
इस दबाव के बावजूद भारत में कई बार टैक्स और खुदरा कीमतों में हस्तक्षेप किया गया .
हाल के संशोधनों के साथ 2026 में लगातार तीन बार यानि 15 को पेट्रोल डीजल की कीमतों में ₹3 की बढ़ोतरी की गई , 19 मई को पेट्रोल की कीमत ₹0.87 और डीजल की कीमत ₹0.91 बढ़ाई गई, वही आज यानि 23 मई को एक बार पेट्रोल और डीजल की कीमत क्रमशः ₹0.87 और ₹0.91 OMC के द्वारा बढ़ाई गई है .
यह भी पढ़ें : Gold Silver Prices Drop Today: गिर गए सोने चांदी के भाव, जानें आपके शहर में क्या है 22K और 24K सोने का दाम
UPA सरकार ने 2005–2010 के बीच करीब ₹1.34 लाख करोड़ के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे. यह देनदारी आज की सरकार द्वारा ब्याज सहित चुकाई जा रही है.
इसके विपरीत, मौजूदा नीति में सरकार टैक्स सीधे घटाकर उपभोक्ता को राहत देने का प्रयास करती है, जिससे राजस्व पर तत्काल असर पड़ता है.
2026 के हॉर्मुज़ संकट और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के दौरान—
इसके अलावा 2021–24 और LPG सब्सिडी के कारण भी हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय दबाव बना रहा.
27 मार्च 2026 को सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए—
सरकारी बयान के अनुसार, इसका उद्देश्य OMCs की भारी अंडर-रिकवरी को कम करना था, न कि तुरंत उपभोक्ता कीमत घटाना.
इसलिए केंद्र द्वारा टैक्स कट के बावजूद, बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों और कंपनियों के नुकसान की भरपाई के कारण पंप पर तुरंत राहत नहीं दिखी. भारत की ईंधन मूल्य प्रणाली एक “मल्टी-लेयर फाइनेंशियल मॉडल” है, जिसमें केंद्र, राज्य और तेल कंपनियां मिलकर कीमत तय करती हैं.
यह भी पढ़ें : Bakrid 2026: हर मुसलमान मक्का में शैतान को पत्थर क्यों मारते हैं? क्या है इतिहास और इस्लामिक संदेश
2022 से 2026 के बीच वैश्विक ऊर्जा संकटों ने इस प्रणाली को लगातार दबाव में रखा है.अभी भी अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू टैक्स संरचना के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है.
न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।