Stoning Of Devil: हज के दिन चल रहे हैं और बकरीद ईद करीब है. इस बार भारत में बकरीद 28 मई को मनाई जाएगी. बकरीद के मौके पर दुनिया के लाखों मुसलमान हज के लिए सऊदी अरब के मक्का शहर की ओर रवाना होते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं. इस दौरान कई अरकान पूरे किए जाते हैं, जिसमें से “रमी अल-जमरात” भी शामिल है. इस अरकान में शैतान को कंकड़ मारे जाते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक संदेश छिपा है. अगर आपको नहीं पता है तो यह लेख आपकी मदद कर सकता है.
क्या है शैतान को पत्थर मारने की रस्म?

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हज के अरकान पूरा करने के लिए मुस्लिम मीना जाते हैं. यहीं पर जमरात नाम की जगह पर शैतान को कंकड़ मारे जाते हैं. यहां पर तीन बड़े स्तंभ बनाए गए हैं और लोग यहीं पर छोटे-छोटे कंकड़ मारते हैं, जिसे रमी कहा जाता है. इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है.
हजरत इब्राहिम से जुड़ी है यह कहानी

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इस्लामिक किताब कुरान के मुताबिक, हजरत इब्राहिम को अल्लाह ने अपने बेटे की कुर्बानी देने का हुकुम दिया था. जब वह अल्लाह के हुक्म को पूरा करने जा रहे थे, तब शैतान ने उन्हें बहकाने और रोकने की कोशिश की.
हजरत इब्राहिम ने मारे थे कंकड़े

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शैतान हजरत इब्राहिम को अल्लाह का आदेश मानने से रोक रहा था. वह तीन अलग-अलग जगहों पर आया और तब हजरत इब्राहिम ने उसे भगाने के लिए कंकड़ मारे थे. इसलिए हर मुसलमान आज भी हज के दौरान शैतान को कंकड़ मारते हैं.
क्या है इस रस्म का इस्लामिक संदेश?

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इस रस्म का मतलब सिर्फ पत्थर मारना नहीं है, बल्कि इसे इंसान के भीतर मौजूद बुराइयों, लालच, गुस्से और गलत रास्तों को ठुकराने का जरिया माना जाता है. जब जमरात पर कंकड़ मारते हैं तो वह यह संदेश देते हैं कि इंसान को हर हाल में बुराई और शैतानी सोच से दूर रहना चाहिए.