Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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सिंधु जल समझौते को लेकर पाकिस्तान की ओर से मिल रही गीदड़ भभकी के बीच भारत ने अपना रुख एक बार फिर पूरी तरह साफ कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को साफ कहा कि पाकिस्तान की आक्रामक बयानबाजी का भारत के फैसले पर कोई असर नहीं होने वाला है. जब तक पड़ोसी देश सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और अपरिवर्तनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल समझौता स्थगित ही रहेगा.
दरअसल, अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 26 पर्यटकों की जान चली गई थी. इस हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था. तभी से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह झूठ फैला रहा है कि भारत का यह फैसला नदियों के पानी को साझा करने वाले देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम कर रहा है.
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इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में नाकाम रहे पाकिस्तान के नेताओं ने अब अपनी हताशा में गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी शुरू कर दी है. हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के पूर्व मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत को गीदड़ भभकी देते हुए ‘न्यूक्लियर ऑप्शन’ का जिक्र किया. बिलावल ने कहा, ‘पाकिस्तान के परमाणु बम सिर्फ सजावट या प्रदर्शन के लिए नहीं हैं. अगर सिंधु जल समझौते को बहाल करने के सारे प्रयास विफल होते हैं, तो पाकिस्तान को परमाणु विकल्प पर विचार करना चाहिए.’
इसके साथ ही पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी कहा कि उनका देश भारत के इस फैसले को खारिज करता है और यह संधि पूरी तरह वैध और लागू है.
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पाकिस्तानी धमकियों का करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘सिंधु जल समझौते पर भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट और सुसंगत है. पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार दिए जा रहे समर्थन के विरोध में यह समझौता स्थगित रहेगा. पाकिस्तान को विश्वसनीयता और पूरी गंभीरता के साथ आतंकवाद को सह देना बंद करना होगा.’
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रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद की फैक्टरी चलाने वाला पाकिस्तान इस मामले में खुद के बुने जाल में फंस चुका है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उसे झटका लग रहा है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने एक साझा बयान जारी कर पाकिस्तान से संचालित होने वाले आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की है और आतंकी पनाहगाहों को नष्ट करने की मांग की है.
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