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‘पाकिस्तान की बर्बादी का कारण भारत नहीं, उसकी अपनी सेना’, सिंगापुर के पूर्व राजदूत का बड़ा दावा

जब कौसिकन से पूछा गया कि अगले पांच वर्षों में वह पाकिस्तान को कहां देखते हैं, तो उन्होंने बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की. उन्होंने पाकिस्तान को 'विफलता की कगार पर लड़खड़ाता हुआ देश' करार दिया.

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सिंगापुर के पूर्व राजदूत बिलाहारी कौसिकन ने पाकिस्तान के मौजूदा संकट के लिए वहां के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है. एक वैश्विक सम्मेलन में बोलते हुए कौसिकन ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की गहरी होती जा रही समस्याएं पूरी तरह से उसकी खुद की पैदा की हुई हैं, न कि भारत या अफगानिस्तान के साथ जारी तनाव का नतीजा. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराकर पाकिस्तान ने जो राजनयिक सफलता हासिल की है, उससे देश के भीतर पनप रहे गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक संकटों का समाधान नहीं होने वाला है.

‘खुद की वजह से फेल हो रहा पाकिस्तान’


सम्मेलन के दौरान चर्चा के समय जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने यह तर्क देने की कोशिश की कि पाकिस्तान की चुनौतियां काफी हद तक उसकी भौगोलिक स्थिति और भारत-अफगानिस्तान के साथ मुश्किल संबंधों से जुड़ी हैं, तो पूर्व राजदूत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया. कौसिकन ने कहा, ‘आप हर चीज के लिए अपनी भौगोलिक स्थिति को दोष नहीं दे सकते. यह सिर्फ एक बहाना है.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की असली समस्या उसके पड़ोसियों की वजह से नहीं, बल्कि उसके अपने खराब शासन तंत्र के कारण है.

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निशाने पर आई पाकिस्तानी सेना


बिलाहारी कौसिकन ने पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक और आर्थिक बदहाली के लिए वहां की सेना के अत्यधिक हस्तक्षेप और कमजोर राजनीतिक नेतृत्व को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, ‘पाकिस्तान का शुरुआत से ही बेहद खराब तरीके से कुप्रबंधन किया गया है. मुझे इसका कोई समाधान नजर नहीं आता. वहां के राजनेता सिर्फ समय की बर्बादी हैं, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों. इसके साथ ही वहां की सेना इस पूरी समस्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा है.’

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विफलता की कगार पर खड़ा है पाकिस्तान

जब कौसिकन से पूछा गया कि अगले पांच वर्षों में वह पाकिस्तान को कहां देखते हैं, तो उन्होंने बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की. उन्होंने पाकिस्तान को ‘विफलता की कगार पर लड़खड़ाता हुआ देश’ करार दिया. उन्होंने कहा कि इन राजनयिक सफलताओं से देश की बुनियादी ढांचागत समस्याएं बदलने वाली नहीं हैं और न ही इससे अमेरिका के साथ उसके संबंधों में कोई बड़ा सुधार आने की उम्मीद है.

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First published on: Jul 03, 2026 07:35 PM

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