Hate Speech News: पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश में एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तिजनक बयानों और टिप्पणी करने के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। इसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ा है। नफरती भाषणों और बयानों के चलते कई बार हालात बेकाबू होने की नौबत भी आ रही है।
इस बीच आईआईएम बेंगलुरु फैकल्टी के मौजूदा और सेवानिवृत्त सदस्यों ने कॉर्पोरेट इंडिया के नाम खुला खत जारी किया है। इसमें उनसे अपील की गई है कि देश में न्यूज़ के नाम पर झूठी अफवाह फैलाने और हेट स्पीच को बढ़ावा देने वाले न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया साइट के वित्तीय पोषण को बंद कर देश के हालात को बेहतर बनाएं।
उनका कहना है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों को छोड़ दें तो लगभग सभी सूचकांक में भारत का प्रदर्शन वर्तमान में सबसे गरीब और अलोकतांत्रिक देशों की सूची के समकक्ष नजर आता है। इसका भारी नुकसान बहुसंख्यक आम नागरिकों को ही नहींस बल्कि भारत में विदेशी निवेश पर भी पड़ा है।
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इसी को ध्यान में रखते हुए और देश की आन्तरिक स्थिति से चिंतित देश के चुनिंदा लब्धप्रतिष्ठ संस्थानों में से एक आईआईएम बेंगलुरु के फैकल्टी मेंबर्स और सेवानिवृत्त सदस्यों ने एक खुला पत्र लिखकर अपनी चिंताओं को भारतीय कॉरपोरेट के साथ साझा कर एक बड़ी पहल ली है।
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अपने पत्र में इनका कहना है कि हम व्यक्तिगत हैसियत से भारतीय कॉरपोरेट्स के दिग्गजों के नाम संदेश पहुंचाना चाह रहे हैं कि देश में हिंसक झड़प और आंतरिक सुरक्षा की लगातार बिगड़ती स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से हेट स्पीच और भ्रामक प्रचार करने वाले आउटलेट के वित्तपोषण पर रोक लगानी चाहिए।
https://www.youtube.com/watch?v=nR1S6OwZc2g
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इस बीच आईआईएम बेंगलुरु फैकल्टी के मौजूदा और सेवानिवृत्त सदस्यों ने कॉर्पोरेट इंडिया के नाम खुला खत जारी किया है। इसमें उनसे अपील की गई है कि देश में न्यूज़ के नाम पर झूठी अफवाह फैलाने और हेट स्पीच को बढ़ावा देने वाले न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया साइट के वित्तीय पोषण को बंद कर देश के हालात को बेहतर बनाएं।
उनका कहना है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों को छोड़ दें तो लगभग सभी सूचकांक में भारत का प्रदर्शन वर्तमान में सबसे गरीब और अलोकतांत्रिक देशों की सूची के समकक्ष नजर आता है। इसका भारी नुकसान बहुसंख्यक आम नागरिकों को ही नहींस बल्कि भारत में विदेशी निवेश पर भी पड़ा है।
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अपने पत्र में इनका कहना है कि हम व्यक्तिगत हैसियत से भारतीय कॉरपोरेट्स के दिग्गजों के नाम संदेश पहुंचाना चाह रहे हैं कि देश में हिंसक झड़प और आंतरिक सुरक्षा की लगातार बिगड़ती स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से हेट स्पीच और भ्रामक प्रचार करने वाले आउटलेट के वित्तपोषण पर रोक लगानी चाहिए।
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