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रील लाइफ से रियल सत्ता तक: TVK की जीत के पीछे ये 6 चेहरे बने विजय की सबसे बड़ी ताकत

तमिलनाडु की राजनीति में TVK के उभार और जोसेफ विजय के मुख्यमंत्री बनने की कहानी केवल स्टारडम की नहीं, बल्कि एक मजबूत रणनीतिक टीम की भी है. विजय के पिता एस. ए. चंद्रशेखर से लेकर डिजिटल रणनीतिकारों और संगठन संभालने वाले नेताओं तक, इन 6 चेहरों ने मिलकर विजय को रील लाइफ का हीरो से रियल लाइफ का नेता बना दिया.

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Written By: kj.srivatsan Updated: May 10, 2026 19:39
vijay thalapathy
Credit: Social Media

तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनावों को एक बड़े बदलाव के रूप में पेश किया गया है. इस कथित परिदृश्य में TVK के नेतृत्व में अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय को एक निर्णायक राजनीतिक शक्ति के रूप में दिखाया गया है. लेकिन विजय की इस ताकत के पीछे उनके पार्टी के 6 बड़े नेताओं की रणनीति भी शामिल रही है जिसने फिल्मी दुनिया यानी रील लाइफ के हीरो को रियल लाइफ का भी हीरो बनकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा दिया. स्टार से नेता तक का सफर विजय के लिए भी कोई आसान नहीं रहा. 3 साल पहले अपनी नई पार्टी बना दी लेकिन इस पार्टी को आगे बढ़ा दे और सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने की एक बड़ी चुनौती उनके सामने थी. खुद विजय को तो सब लोग पहचानते थे ऐसे में पार्टी की नीतियों, सिद्धांतों और बाकी उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए विजय ने एक मजबूत टीम चुनी. इस टीम की कड़ी मेहनत ने विजय की लोकप्रियता और जनसंपर्क क्षमता को अपना प्रमुख माध्यम बनाया और पार्टी को तेजी से जनसमर्थन दिलाया. कहा गया है कि उनकी छवि ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के मुकाबले एक नई राजनीतिक ऊर्जा पैदा की.

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‘नई टीम’ और उसका संगठनात्मक ढांचा

टीवीके की सफलता का श्रेय एक संगठित कोर टीम को दिया गया है, जिसमें अलग-अलग विशेषज्ञ भूमिकाएं निभाई, लोगों खासकर विजय के समर्थकों और युवाओ को एकजुट किया. इसमें S A चंद्रशेखर – विजय के पिता जिन्होंने विजय को राजनीति के इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए. उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर तमिल सिनेमा के जाने-माने निर्देशक हैं. विजय को सुपरस्टार बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है. विजय की मां शोभा चंद्रशेखर. विजय के पिता ने अपने बेटे के लिए फिल्मों में कुछ ऐसे किरदार तैयार किए, जिसमें एंटी एस्टेब्लिशमेंट के खिलाफ नायक को संघर्ष करते दिखाया गया है. यह बताने की कोशिश की की नेतृत्व कैसा होना चाहिए . उसके जरिए क्या-क्या काम-किस तरह से किए जाने की जरूरत है. विजय के इन किरदारों के जरिए जनता को एक नई सोच मिलने लगी.

एन. आनंद का नाम सबसे पहले है विजय ने आनन्द को पार्टी का जमीनी संगठन और फैन-आधारित नेटवर्क को राजनीतिक संरचना में बदलने वाला प्रमुख चेहरा बनाया. विजय के बाद पार्टी के तमाम फैसले आनंद द्वारा ही लिए जाते रहे हैं. यहां तक की चुनाव से पहले पार्टी प्रत्याशियों के चयन से जुड़े होमवर्क को भी आनंद ने ही पूरा किया. जब सरकार बनी तो विजय ने इन्हें भी अपनी सरकार में मंत्री पद की शपथ दिलवाई.

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आधव अर्जुन को बूथ-स्तरीय प्रबंधन और चुनावी रणनीति का मुख्य संचालक बताया गया, जिन्होंने युवाओं और सामाजिक समूहों को जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाई. इससे पहले भी डीएमके और विदुठलाई चिरुथा कच्ची यानी VCK में भी रह चुके हैं. ऐसे में राजनीतिक अनुभवों का विजय को पूरा लाभ मिला. बहुमत का आंकड़ा नहीं मिलने पर माधव अर्जुन के जिम्मे ही छोटे राजनीतिक दलों को मानने और समर्थन जुटाने की रही और सरकार बनने पर विजय ने उन पर आगे भी पूरा विश्वास जताते हुए अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया.

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सी टी आर निर्मल कुमारसोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेनिंग का प्रमुख रणनीतिकार बताया गया है. नतीजा युवाओं के बीच विजय के भाषण, DMK सरकार की कमियां और जनता की विजय से उम्मीदें पहुंचने लगी. सोशल मीडिया के जरिये सत्ता परिवर्तन की जरूरत का माहौल बना.

के जी अरुनराज- नीति निर्माण और प्रशासनिक सोच से जुड़ा टेक्नोक्रेटिक की जिम्मेदारी सौंपी. विजय की जनसभाओं से लेकर उनके राजनीतिक कार्यक्रमों तक की रूपरेखा तैयार कर पूरा करने की इन पर जिम्मेदारी रही. इन्होंने सोशल मीडिया पर विजय और उनके भाषण से जुड़ी ऐसी बातें जनता के बीच प्रचारित की जाती जिसने की युवाओं को लुभाया.

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राजमोहन – युवाओं और डिजिटल दर्शकों तक पार्टी की बात पहुंचाने वाले कंटेंट रणनीतिकार के रूप में दिखाया गया है. इन्होंने जनता के बीच जोसेफ विजय को लेकर इस सोच को भी बदला, कि वे केवल फिल्मी हीरो ही नहीं है बल्कि दूरगामी राजनीतिक सोच भी रखते हैं. ये भी सरकार में मंत्री बने हैं.
विजय के साथ लगातार काम कर ही इस टीम ने टीवीके के पूरे चुनाव कैम्पेन को ही तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति से अलग एक “हाइब्रिड मॉडल” बनाकर पेश किया. फैन-कल्चर + डिजिटल स्ट्रैटेजी + ग्राउंड नेटवर्क को मिलाकर प्रचार का नया ढांचा बनाया गया. जिसके बारे में DMK और AIADMK सोच भी नहीं पाई. यानी इस टीम ने तमिलनाडु की राजनीति में “नई पीढ़ी बनाम पारंपरिक दलों” कर नतीजे को साबित कर दिखा दिया कि दिखाया कैसे संगठन, डिजिटल रणनीति और लोकप्रिय नेतृत्व मिलकर एक नई राजनीतिक संरचना बना सकते हैं.

First published on: May 10, 2026 07:35 PM

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