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कोरोना वैक्सीन के बाद Ebola वायरस की दवाई बनाएगी भारतीय कंपनी, अब तक 200 से ज्यादा मौतें और 900 बीमार

Ebola Virus Vaccine: इबोला वायरस का प्रकोप फैलता जा रहा है। इससे पहले की यह पूरी दुनिया में फैल जाए, वैक्सीन बनाकर इस पर लगाम लगानी होगी। इसके लिए करीब 570 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है, जो भारतीय कंपनी समेत दुनियाभर की कंपनियों को मिला है।

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इबोला वायरस की वैक्सीन बनाने का फैसला लिया गया है। क्योंकि यह महामारी दिन-ब-दिन फैलती जा रही है। इसके बढ़ते खतरे को देखते हुए WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी लागू की हुई है। भारत सरकार ने भी कोरोना काल जैसे प्रोटोकॉल लागू कर दिए, लेकिन अब वैक्सी बनाकर इसे फैलने से रोका जाएगा। इसके लिए दुनियाभर में महामारी से निपटने वाली वैश्विक संस्था ‘सेपी’ (CEPI) ने इबोला वायरस वैक्सीन बनाने के लिए $60 मिलियन (570 करोड़ रुपये) के फंड आवंटित किया है।

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200 से ज्यादा लोगों की हो चुकी मौत

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा सहित पूर्वी अफ्रीका में इबोला वायरस जानलेवा बना हुआ है। वायरस का एक स्ट्रेन ‘बुंडिबुग्यो’ अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है। 900 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में हैं। हालातों को देखते हुए वैक्सीन विकसित करने के लिए CEPI कंपनी ने इबोला की वैक्सीन बनाने के लिए भारतीय कंपनी सहित 3 ग्रुपों को 570 करोड़ रुपये दिए हैं। CEPI प्रमुख रिचर्ड हैचेट ने फंड का ऐलान करते हुए जल्द से जल्द वैक्सीन बनाने का निर्देश दिया है।

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इन कंपनियों में बांटे गए 570 करोड़

बता दें कि CEPI ने ही कोरोना महामारी की वैक्सीन बनाने के लिए फंड दिया था। अब अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनिशिएटिव (IAVI) को करीब 60 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता वैक्सीन बनाने के लिए दी गई है। सबसे ज्यादा 50 मिलियन डॉलर मॉडर्ना कंपनी को दिए गए हैं। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) को 8.6 मिलियन डॉलर मिले हैं।

ऑक्सफोर्ड और सीरम मिलकर ChAdOx1 Bundibugyo नामक वैक्सीन बनाएंगे, जो उस टेक्नोलॉजी पर बनेगी, जिस पर कोरोना काल में ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) वैक्सीन बनाई गई थी। तीसरी संस्था IAVI को वैक्सीन बनाने के लिए 3.2 मिलियन डॉलर दिए गए हैं। IAVI सिंगल-डोज वैक्सीन उस टेक्नोलॉजी से बनाएगी, जिससे मर्क (Merck) कंपनी की ‘इरवेबो’ (Ervebo) वैक्सीन बनी है। इरवेबो ने ही इबोला के ‘जायरे’ (Zaire) स्ट्रेन को फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभाई थी।

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इबोला के लिए करोड़ों डॉलर का पैकेज

दुनिया के कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इबोला के संकट से निपटने के लिए करोड़ों डॉलर के पैकेज देकर मदद की है। वैश्विक वैक्सीन गठबंधन ‘गावी’ (Gavi) ने 50 मिलियन डॉलर देने का संकल्प लिया है। वर्ल्ड बैंक के ‘पेंडैमिक फंड’ ने 220.6 मिलियन डॉलर (करीब 1,840 करोड़ रुपये) की ग्रांट दी है। अफ्रीका महाद्वीप के देशों और वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों मिलकर इस भारी भरकम आर्थिक मदद और वैज्ञानिकों की मेहनत से इस जानलेवा महामारी को जल्द ही नियंत्रित कर लेंगे।

First published on: Jun 02, 2026 12:44 PM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के IMC&MT इंस्टीट्यूट से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं Mphil कोर्स किया है। पिछले 12 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही हैं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के News 24 Hindi डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हैं। यहां खुशबू नेशनल, इंटरनेशनल, लाइव ब्रेकिंग, पॉलिटिक्स, क्राइम, एक्सप्लेनर आदि कवर करती हैं। इससे पहले खुशबू Amar Ujala और Dainik Bhaskar मीडिया हाउस के डिजिटल विंग में काम कर चुकी हैं।

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