क्या है CRPC की धारा 144, जो नोएडा में लागू; जानिए इस सेक्शन के बारे में सब कुछ

CRPC Section 144 Provisions

CRPC Section 144 Provisions

विज्ञापन

देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में 20 से 25 सितंबर तक धारा 144 लागू रहेगी। वैसे नोएडा में अकसर धारा 144 लगी रहती है, लेकिन इस बार इसे इसलिए लगाया गया है, क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नोएडा आ रही हैं। वे यहां जनपद में UP इंटरनेशनल ट्रेड शो में शिरकत करने आएंगी। इसके चलते अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) हृदेश कठेरिया ने गौतमबुद्ध नगर में धारा 144 लागू की है। इस दौरान ड्रोन उड़ाने, कोई कार्यक्रम, रैली, धरना करने और एक जगह 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठे होने पर पूर्णत: बैन रहेगा। आदेशों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर धारा 144 है क्या? यह क्यों लगाई जाती है, कब लगाई जाती है और इसका उल्लंघन करने पर संविधान के तहत सजा का प्रावधान क्यों हैं, आइए हम बताते हैं…

यह भी पढ़ें: SU-30 MKI Fighter Jets: IAF के बेड़े में शामिल होंगे 12 और सुखोई, खूबियां ऐसी कि दुश्मन का सिर चकरा जाए

विज्ञापन

देश की सुरक्षा के लिए धारा 144

दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure 1973) CRPC की धारा 144 समाज में शांति व्यवस्था कायम करने के लिए लगाई जाती है। जब भी देश में कहीं सुरक्षा की दृष्टि से खतरा होता है या तनाव का माहौल होता है तो धारा 144 लगा दी जाती है। कहीं विधानसभा, लोकसभा या पंचायत चुनाव हों या अन्य कोई चुनाव हो तो धारा-144 लगाई जाती है। कहीं दंगा, बवाल, मारपीट या मॉब लिंचिंग होने का खतरा हो तो 144 लगाकर स्थिति को कंट्रोल में लिया जाता है। कानून व्यवस्था पर संकट मंडराने की स्थिति में धारा 144 लागू कर दी जाती है। इसके तहत इंटरनेट सेवाएं ठप की जा सकती हैं।

बाजार-दुकानें बंद रखने के आदेश दिए जा सकते हैं। एक जगह 5 या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठे होने पर पाबंदी होती है। इस दौरान लोगों के हथियार लेकर चलने पर पाबंदी होती है। धारा 144 लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानी जिलाधिकारी द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया जाता है। इसके लगाने का मकसद आपात स्थिति से बचना और बचाना है। दंगा, लूटपाट, मारपीट, हिंसा आदि रोकने के लिए कई बार इसे लगाना अनिवार्य हो जाता है, ताकि अगर हालात बिगड़ें, लोग भड़कें तो अन्य नागरिकों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सके।

विज्ञापन

कितने समय के लिए लगाई जाती धारा 144

कानून के तहत धारा-144 को कम से कम 2 महीने के लिए लगाया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा 6 महीने के लिए लगाई जा सकती है। अगर जरूरत पड़ी तो इसकी अवधि को बढ़ाया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में इसे 6 महीने से ज्यादा समय तक नहीं लगाया जा सकता। वहीं आदेश जारी होन के समय से ही धारा 144 लागू हो जाती है।

विज्ञापन

धारा 144 के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान

जब इलाके में धारा 144 लागू हो जाती है तो उसका उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान भी कानून के तहत किया गया है। नियमों के अनुसार, धारा 144 का उल्लंघन करने वाले को गिरफ्तार किया जा सकता है। धारा 107 या धारा 151 के तहत गिरफ्तारी का प्रावधान किया गया है। धारा का उल्लंघन करने वाले को या पालन नहीं करने पर आरोपी को एक साल की जेल हो सकती है। ज्यादा से ज्यादा 3 साल की जेल हो सकती है। वैसे यह जमानती अपराध है।

 

विज्ञापन

 

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें

/ताज़ा खबरें

विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ