दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े छात्र आंदोलन के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) देशभर में चर्चा का केंद्र बनी हुई है. CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध मार्च का ऐलान किया है. इसी बीच C-Voter ने युवाओं के मूड और चुनावी मुद्दों को लेकर एक खास सर्वे किया है. सर्वे में पूछा गया कि अगर CJP चुनाव लड़ती है, तो क्या लोग उसे वोट देंगे? इसके जवाब काफी चौंकाने वाले रहे हैं. युवाओं को रोजगार योग्य बनाने की जिम्मेदारी पर 63 फीसदी लोगों ने केंद्र व राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया. 14 फीसदी ने स्कूल-कॉलेजों और 9 फीसदी ने निजी कंपनियों की भूमिका बताई.
वहीं रोजगार के संकट पर 32% ने नौकरियों की कमी, 18% ने कम वेतन, 17% ने डिग्री के अनुसार काम न मिलने और 17% ने सरकारी भर्तियों की धीमी प्रक्रिया को बड़ी वजह बताया.
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क्या CJP को चुनाव लड़ना चाहिए?
सर्वे के अनुसार, 43 फीसदी लोगों का साफ कहना है कि वे CJP को वोट नहीं देंगे, जबकि 33 फीसदी लोगों ने वोट देने की बात कही. वहीं 39 फीसदी लोगों का मानना है कि CJP को सिर्फ एक 'दबाव समूह' बनकर काम करना चाहिए, जबकि 26 फीसदी चाहते हैं कि यह चुनावी मैदान में उतरे. बता दें कि CJP के अभिजीत दीपके पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन खुद को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत नहीं कराएगा.
Gen-Z के लिए सबसे बड़ा मुद्दा: नौकरी और बेरोजगारी
सर्वे में जब देश की सबसे बड़ी समस्या को लेकर सवाल पूछा गया तो जनता ने रोजगार को शीर्ष पर रखा. 22.7% लोगों ने बेरोजगारी को सबसे बड़ी समस्या बताया. 18.1% ने महंगाई और 7.3% ने किसानों के संकट को मुख्य मुद्दा माना. खासतौर पर Gen-Z से जब उनके अहम मुद्दों पर राय ली गई तो 53 फीसदी ने सीधे तौर पर 'नौकरी' को प्राथमिकता दी. इसके अलावा 22 फीसदी ने शिक्षा, 12 फीसदी ने जीवन-यापन के खर्च और 4 फीसदी ने मानसिक स्वास्थ्य को अहम माना.
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सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क
CJP द्वारा इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च के ऐलान के बाद सुरक्षा एजेंसियां और दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड पर हैं. लुटियंस दिल्ली और आसपास के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, CJP ने देशभर के छात्रों और युवाओं से इस मार्च में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल होने की अपील की है.
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