नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें बहुत से लोग देश के प्रधानमंत्री समेत कई दिग्गजों को गाली देते या अपमानजनक टिप्पणी करते नज़र आए. पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्द कहने वाली ऐसी है एक 25 साल की युवती के खिलाफ ज़ीरो FIR दर्ज की गई. जिसके बाद ये चर्चा हो रही है कि क्या कानून ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने पर किसी को क्रिमिनल मानकर सज़ा दे सकता है. आइए इस बारे में विस्तार से आपको बताते हैं.
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क्या हैं BNS के नियम?
दरअसल, भारतीय न्याय संहिता यानी BNS में गाली गलौज या आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर सज़ा देने का कोई अलग से प्रावधान नहीं है. किसी के इस्तेमाल किए गए अभद्र शब्दों का अपराध माना जाना, उस घटना के इरादे और नतीजों पर डिपेंड करता है. ऐसे में BNS की धारा 352 लागू की जा सकती है, जो ‘शांति-भंग करने के इरादे से जान-बूझकर किसी को अपमानित’ करने से जुड़ी है.इसके तहत, तभी किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है जब उसकी अपमानजनक टिप्पणियों का मकसद शांति-भंग करना, किसी को उकसाना हो या हिंसा भड़काना हो. अगर कोई व्यक्ति धारा 352 के तहत दोषी पाया जाता है तो उसे दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
धारा 351 और 356 कब होती है लागू?
अगर कोई गाली देने के साथ किसी व्यक्ति की जान, इज्जत या प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने की धमकी देता है, तो उसपर धारा 351 के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. इसमें दो साल की सज़ा हो सकती है और अगर धमकियां ज्यादा गंभीर हों तो 7 साल तक की जेल भी हो सकती है. वहीं, अगर किसी व्यक्ति के आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल से किसी की प्रतिष्ठा को ठेंस पहुंचती है, तो ऐसे में धारा 356 लगाई जा सकती है जो मानहानि के लिए होती है. अगर शब्दों या हरकतों से किसी महिला की मर्यादा पर बात आती है, तो BNS की धारा 79 लागू हो सकती है.
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