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क्या हैं स्मारक सिक्का जारी करने के नियम, खरीदने-बुकिंग की प्रक्रिया? मोढेरा सूर्य मंदिर के 1000 वर्ष पूरे होने के मौके पर होगा जारी

गुजरात के मोढेरा सूर्य मंदिर के 1000 वर्ष पूरे होने के मौके पर स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा, जिसका नोटिफिकेशन बीते दिन केंद्र सरकार ने जारी किया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि स्मारक सिक्का जारी करने के नियम क्या हैं और स्मारक सिक्का को खरीदने की प्रक्रिया क्या है?

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केंद्र सरकार ने गुजरात के मोढेरा सूर्य मंदिर के 1000 वर्ष पूरे होने के मौके पर 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी करने की घोषणा की है और अधिसूचना भी जारी कर दी है. इस सिक्के में आगे वाले हिस्स में अशोक स्तंभ अंकित होगा और नीचे सत्यमेव जयते लिखा होगा. बाईं ओर देवनागरी लिपि में भारत और दाईं ओर इंगलिश में INDIA अंकित होगा. रुपये का प्रतीक चिह्न (₹) और सिक्के का मूल्य 100 अंकित होगा. सिक्के के पिछले भाग में मोढेरा सूर्य मंदिर का चित्र होगा. जिसके ऊपर 1026–2026 वर्ष अंकित होंगे. नीचे अंग्रेजी में 1000 YEARS OF MODHERA SUN TEMPLE GUJARAT लिखा होगा और इस सिक्के को विशेष कार्यक्रम में जारी किया जा सकता है.

यूनेस्को की विश्व सूची में शामिल मंदिर

मोढेरा सूर्य मंदिर मेहसाना जिले में पुष्पावती नदी के तट पर बना है.सोलंकी-शैली (मारू-गुर्जर) की वास्तुकला के लिए दुनियाभर में मशहूर मंदिर का निर्माण चालुक्य (सोलंकी) वंश के राजा भीम प्रथम के शासनकाल में 1026-27 ईस्वीं में हुआ था. यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में मंदिर का नाम शामिल किया गया है. गुजरात के मोढेरा सूर्य मंदिर की यादगार के तौर पर जारी होने वाला 100 रुपये का सिक्का 50% चांदी से बनेगा और इसक वजन 35 ग्राम होगा, यानी इसमें 17.5 ग्राम शुद्ध चांदी होगी. जिसकी कीमत भारतीय बाजार में 1500 रुपये से ज्यादा होगी. इसलिए लोग इस सिक्के को बाजार में चला नहीं पाएंगे, बल्कि इसे खरीदकर सहेजकर रख सकते हैं.

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कौन जारी करता है स्मारक सिक्का?

बता दें कि सिक्का निर्माण अधिनियम 2011 के तहत विशेष अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय के द्वारा विशेष संस्थान की याद के तौर पर या किसी महान हस्ती की याद में उसे श्रद्धांजलि देने के लिए स्मारक सिक्का जारी किया जाता है. केंद्र सरकार 1 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक के सिक्के बनाकर जारी कर सकती है. 50, 100, 150 या 1000 वर्ष पूरे होने के मौके पर स्मारक सिक्का जारी करने के लिए राज्य सरकार, वैधानिक संगठन, पंजीकृत ट्रस्ट या संस्था के द्वारा केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाता है. अगर केंद्र सरकार प्रस्ताव मंजूर कर लेती है तो वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग गजट नोटिफिकेशन जारी करता है, जैसे मोढेरा सूर्य मंदिर का जारी हुआ है. इसके बाद मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और नोएडा स्थित आधिकारिक टकसाल में सिक्के को ढालकर विशेष कार्यक्रम में उन्हें जारी किया जाता है.

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2 प्रकार के सिक्के जारी करती सरकार

बता दें कि केंद्र सरकार 2 प्रकार के स्मारक सिक्के जारी करती है. एक चलन वाले सिक्के, जो 2, 5, 10, 20 के होते हैं और बाजार में चलाए जा सकते हैं. यह सिक्के तांबे-निकेल या स्टील के बनाए जाते हैं और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के द्वारा बैंकों जो जारी किए जाते हैं, जो लोगों को लेन-देन के लिए उपलब्ध कराते हैं. दूसरे वे सिक्के, जो बाजार में नहीं चलाए जा सकते, बल्कि यादगार के तौर पर जारी करके सहेजकर रखे जाते हैं. यह सिक्के 100, 125, 150, 500, 1000 रुपये के होते हैं. यह सिक्के बाजार मं इसलिए नहीं चलते, क्योंकि एक तो यह सिक्के चांदी के होते हैं और इनकी प्रीमियम कॉस्ट बहुत ज्यादा होती है और यह सिक्के बहुत कम संख्या में ढाले जाते हैं.

स्मारक सिक्के की कीमत क्या होती है?

बता दें कि स्मारक सिक्के की अनुमानित कीमत की बात करें तो इनकी फेस वैल्यू वही होगी, जो सिक्के पर अंकित होगी, लेकिन प्रीमियम कॉस्ट वह होगी, जितने में सरकार इसे सहेजकर रखने के शौकीनों को बेचेगी. UNC Set के तहत बेचे जाने वाले स्मारक सिक्कों की अनुमानित कीमत 3000 से 4000 रुपये के बीच होती है, क्योंकि यह सिक्का मिंट से चमकाए बिना या मिरर-फिनिशिंग के बिना बनाकर जारी किया जाता है. वहीं प्रूफ सेट के तहत बेचे जाने वाले सिक्के की अनुमानित कीमत 3500 से 5000 रुपये के बीच होती और यह शीशे की तरह चमकते होते हैं और इनकी प्रमाणिकता का सर्टिफिकेट भी जारी किया जाता है.

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सिक्कों की प्रीमियम कॉस्ट ज्यादा क्यों होती?

बता दें कि स्मारक सिक्कों की प्रीमियम कॉस्ट ज्यादा होती है, क्योंकि इन सिक्कों में 50% चांदी, 40% तांबा, 5% निकेल और 5% जस्ता होता है. इन्हें टकसाल में विशेष मशीनों में ढाला जाता है और इनकी पैकेजिंग भी काफी आकर्षक तरीके से की जाती है. इन सिक्कों का वजन करीब 35 ग्राम और व्यास करीब 44 मिलीमीटर होता है. इन सिक्कों के किनारों पर 200 दांत होंगे, जो सिक्के की फिनिशिंग को बेहतरीन और आकर्ष बनाते हैं.

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क्या है स्मारक सिक्का जारी करने की प्रक्रिया?

बता दें कि स्मारक सिक्कों को मार्केट में नहीं चलाया जा सकता, लेकिन इन सिक्कों को सहेजकर रखा जा सकता है. इसके लिए लोगों को सिक्का खरीदना होगा, जो भारत सरकार की आधिकारिक टकसाल (Mint) की ई-कॉमर्स वेबसाइट पर उपलब्ध होगा और ऑनलाइन बुकिंग करके खरीदा जा सकेगा. वेबसाइट के होमपेज पर जाएं और Sign Up/Register पर क्लिक करें. नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि मांगी गई जानकारियां भरें और पैन कार्ड डिटेल देनी अनिवार्य होगी. लॉगइन करने के बाद Commemorative Coins सेक्शन में जाएं, जहां Proof Set या UNC Set विकल्प नजर आएंगे.

पसंदीदा सिक्के को सेलेक्ट करके Add to Cart या Buy Now पर टैप करें. किसी एक सीरीज का या एक टाइप का कॉइन ही बुक किया जा सकता है. सिक्का कार्ट में एड करने के बाद चेकआउट पर टैप करें और ऑनलाइन पेमेंट करके रेसिप्ट लें. संबंधित टकसाल सिक्का डिलीवर करेगी और अपने ऑर्डर का स्टेट्स कभी भी लॉगइन करके ट्रैक ऑर्डर करके चेक कर सकते हैं. विशेष उल्लेखनीय है कि सिक्का ऑर्डर करते समय नकली वेबसाइट के चक्कर में न पड़ें और एक बार ऑर्डर करने के बाद उसे कैंसिल नहीं किया जा सकेगा और न ही रिफंड मिलेगा.

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First published on: Sep 19, 2026 03:46 PM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

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