'कार्बन उत्सर्जन के लिए विकासशील देशों को जिम्मेदार ठहराना गलत', PM मोदी का किस ओर है निशाना?

पीएम मोदी ने आगे कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने पर्यावरण से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है. उन्होंने खास तौर पर नवीकरणीय ऊर्जा को भारत की रणनीति का प्रमुख हिस्सा बताया.

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पिछले 12 वर्षों में भारत ने पर्यावरण से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है. (Photo: X/IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन को लेकर वैश्विक बहस में विकसित और विकासशील देशों की जिम्मेदारियों का मुद्दा उठाया है. शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी अक्सर विकासशील देशों पर अनुचित तरीके से डाल दी जाती है. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्थिति को देखें तो भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन अब भी वैश्विक औसत के आधे से कम है.

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विकसित देशों का उत्सर्जन भारत से 6 गुना अधिक

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित देशों का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत के मुकाबले करीब छह गुना अधिक है. उन्होंने कहा कि भारत इस अंतर को वैश्विक मंचों पर लगातार सामने रखता रहा है. उनके बयान का मुख्य जोर जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी तय करते समय देशों की प्रति व्यक्ति स्थिति और ऐतिहासिक योगदान को ध्यान में रखने पर था. पीएम मोदी ने कहा कि विकासशील देशों को केवल उनके मौजूदा उत्सर्जन के आधार पर जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास की अपनी जरूरतों को भी आगे बढ़ा रहा है.

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किसकी ओर था पीएम मोदी का निशाना?

गौरतलब है कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ के लिए कथित तौर पर कार्बन उत्सर्जन को जिम्मेदार ठहराया गया और नेपाल ने इसके लिए भारत समेत विकसित और विकासशील देशों से मदद के साथ मुआवजा भी मांगा. हालांकि बाद में नेपाल विदेश मंत्रालय ने ऐसे किसी बयान को खारिज कर दिया, लेकिन तब से ही कार्बन उत्सर्जन का मामला ग्लोबली चर्चा में बना हुआ है. अब पीएम मोदी के इस बयान को नेपाल के आरोपों से जोड़कर देखा जा रहा है.

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12 वर्षों में पर्यावरण के क्षेत्र में प्रगति का दावा

पीएम मोदी ने आगे कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने पर्यावरण से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है. उन्होंने खास तौर पर नवीकरणीय ऊर्जा को भारत की रणनीति का प्रमुख हिस्सा बताया. पीएम के मुताबिक, देश की सौर ऊर्जा क्षमता करीब 12 वर्ष पहले लगभग 2 गीगावाट थी, जो अब 160 गीगावाट से अधिक हो चुकी है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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