---विज्ञापन---

सुरेंद्र कोली क्यों बना था ‘सदा राम’, निठारी केस में बरी होने के बाद कैसे थे आखिरी दिन, क्या करता था काम‌?

सुरेंद्र कोली हरिद्वार में नाम बदलकर रह रहा था और पिछले डेढ़ महीने में 2 नौकरियों छोड़ चुका था. आखिर में उसने चाय की दुकान किराये पर ली, लेकिन उसी दुकान में फंदा लगाकर सुसाइड कर ली. इस बीच उसने जिन-जिन लोगों से मदद ली, उन्हें नहीं पता था कि वह निठारी कांड वाला सुरेंद्र कोली था.

---विज्ञापन---

निठारी हत्याकांड के सभी 13 केसों में बरी हुए सुरेंद्र कोली ने सुसाइड कर लिया है. 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में भूपतवाला इलाके में चाय की एक दुकान में वह फंदे पर लटका मिला. पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, लेकिन पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. वहीं मामले में जांच करते हुए पुलिस ने जब चाय की दुकान के मालिक अनिल शर्मा से बात की तो उसने कई खुलासे किए. वहीं एक और शख्स जय कश्यप ने भी उसके बार में काफी कुछ बताया. उसके भाई के बयान भी दर्ज किए गए.

सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में सुसाइड पर उठे 5 सवाल, क्या राज खुलने के डर से उसकी हत्या हुई?

---विज्ञापन---

7000 रुपये महीना किराये पर ली थी दुकान

अनिल शर्मा ने बताया कि सुरेंद्र कोली ने उससे चाय की दुकान किराये पर ली थी और उसने अपना नाम सदा राम बताया था. उसने बताया था कि वह रोशनबाद में सरकारी फैक्ट्री में काम करता था. लेकिन वहां सैलरी कम थी, इसलिए वह हरिद्वार काम की तलाश में आया. उसने 14000 रुपये एडवांस देकर दुकान 7000 रुपये महीना किराये पर ली थी. वह हरिद्वार काम करने इसलिए आया, क्योंकि यहां अगले साल अर्धकुंभ मेला लगने वाला है, इसलिए तब तक दुकान सेट हो जाएगी, लेकिन अब पता चला है कि वह निठारी कांड वाला सुरेंद्र कोली है.

जून 2026 में परिवार से मिलने गांव गया था

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिला निवासी सुरेंद्र कोली के भाई आनंद कोली ने बताया कि नवंबर 2025 में जेल से रिहा होने के बाद जून में वह परिवार से मिलने आए थे और 15 दिन तक उनके साथ रहे थे. हरिद्वार में चाय की दुकान खोलने से पहले सुरेंद्र ने हरिद्वार और उसके आस-पास के इलाकों में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी और मजदूरी की थी. सुरेंद्र कोली के गांव मंगरुखाल की सरपंच 30 वर्षीय इशू देवी ने बताया कि सुरेंद्र की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी शांति देवी 2010 में अपने 2 बच्चों के साथ गांव छोड़कर चली गई थी. गांव में उनका पैतृक घर खंडहर हो चुका है और भाई कभी-कभी गांव आता है.

---विज्ञापन---

निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोहली ने किया सुसाइड, हरिद्वार में बेचता था चाय

दोस्त के दोस्त को अपना नाम सदाराम बताया

सुरेंद्र के गांव निवासी राजेंद्र लखेड़ा (35) ने बताया कि सुरेंद्र कोली को नवंबर 2025 में निठारी कांड में बरी किया गया था, लेकिन गांव वालों को उसके वापस लौटने पर कोई आपत्ति नहीं थी. वह गांव आया, लेकिन यहां रहा नहीं और आज उसकी मौत होने की खबर मिली है. सुसाइड करने से 25 दिन पहले सुरेंद्र कोली अपने एक दोस्त के घर पर जय कश्यप नामक शख्स से मिला था, जिसे सुरेंद्र कोली ने अपना नाम सदा राम बताया था और रहने के लिए मकान तलाश कर देने का आग्रह किया था, लेकिन पहचान पत्र मांगे जाने पर वह मकान छोड़ चला गया.

---विज्ञापन---

आधार कार्ड मांगा तो मकान छोड़कर चला गया

जय कश्यप ने बताया कि सुरेंद्र कोली मकान मालिकन को अपना आधार कार्ड नहीं देना चाहता था. इसके बाद सुरेंद्र कोली हरिद्वार चला गया. इंसानियत के नाते सुरेंद्र कोली की मदी की थी और अकसर मकान-नौकरी तलाश रहे लोगों की मदद करता हूं. हालांकि सुरेंद्र ने बताया नहीं, लेकिन वह किसी परेशानी में था. उसकी मौत की खबर पढ़ने के बाद ही पता चला कि वह सदा राम नहीं निठारी कांड वाला सुरेंद्र कुमार कोली था, जो 19 साल जेल में बिताने के बाद नवंबर 2025 में जेल से रिहा हुआ था. जबकि उसे इस केस में फांसी और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

निठारी कांड में सुरेंद्र कोली को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की उम्रकैद की सजा, रिहा करने के आदेश

---विज्ञापन---

2 नौकरियां छोड़ने के बाद खोला था टी स्टॉल

पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुरेंद्र कोली 40 दिन पहले हरिद्वार आया था. वहां उसने सबसे पहले एक कारखाने में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. इसके बाद उसने एक फर्म के जरिए अपार्टमेंट में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी ली. लेकिन यह नौकरी भी छोड़ दी और लाल माता मंदिर के सामने भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान किराये पर ले ली. वह दुकान के अंदर ही रहने लग था. लेकिन 18 सितंबर की सुबह जब उसने दुकान नहीं खोली तो पुलिस को बुलाया गया, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ. हरिद्वार शहर के सर्किल अधिकारी शिशुपाल सिंह नेगी मामले में जांच कर रहे.

First published on: Sep 19, 2026 01:08 PM

End of Article

About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola