BRICS Nations Push Energy Security: ब्रिक्स देशों ने उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए मजबूत एनर्जी सिक्योरिटी की मांग की है. उन्होंने अलग-अलग सप्लाई सोर्सेज, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर ऊर्जा बाजारों पर जोर दिया है. ग्रुप ने ये भी माना कि फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) ग्लोबल एनर्जी मिक्स का हिस्सा बने रहेंगे, खासकर उभरते बाजारों और डेवलपिंग इकॉनमीज में.

एनर्जी सिक्योरिटी पर जोर

नई दिल्ली डेकलेरेशन ने ऐसी एनर्जी ट्रांजिशन को सपोर्ट किया जो 'न्यायपूर्ण, व्यवस्थित, समान और समावेशी' हों, साथ ही ग्रीनहाउस-गैस के इमिशन को कम करने की मांग की. इसने तकनीकी तटस्थता और "साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों" के सिद्धांत पर भी जोर दिया. घोषणापत्र के मुताबिक, एनर्जी सिक्योरिटी अलग-अलग सोर्स से बिना रुकावट एनर्जी फ्लो, स्थिर बाजारों और मजबूत सप्लाई चेन पर निर्भर करती है. ब्रिक्स ने अहम एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें सीमा-पार की सुविधाएं भी शामिल हैं, उनकी सुरक्षा की जरूरत पर भी जोर दिया.

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ऊर्जा सुरक्षा की बात क्यों?

ब्रिक्स देशों ने ऊर्जा सुरक्षा पर इसलिए जोर दिया क्योंकि मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और समुद्री रास्तों पर जोखिम से तेल-गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है. कई विकासशील अर्थव्यवस्थाएं एनर्जी इंपोर्ट पर निर्भर हैं, इसलिए ईंधन की कीमतों और सप्लाई में अस्थिरता उनके विकास को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में BRICS ने एनर्जी सोर्सेज में विविधता, सिक्योर सप्लाई, मजबूत बुनियादी ढांचे और स्थिर ऊर्जा बाजारों की जरूरत बताई.

AI तकनीक पर भी बात

ब्रिक्स गुप ने मॉडर्न एनर्जी सिस्टम्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स के रोल पर भी फोकस. ऐसी तकनीकें बिजली-ग्रिड प्रबंधन को बेहतर बनाने, रिन्यूएबल पावर को जोड़ने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने में मदद कर सकती हैं. ब्रिक्स ने स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए गाइडिंग सिद्धांतों का स्वागत किया. इसने स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण के लिए एक स्वैच्छिक 'ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाने की भारत की पहल का भी समर्थन किया.

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न्यूक्लियर, हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी

ब्रिक्स ग्रुप ने अलग-अलग देशों की हालात के आधार पर बैलेंस्ड और डाइवर्स एनर्जी पोर्टफोलियो की वकालत की. इसने एनर्जी सिक्योरिटी और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी, बायो-एनर्जी, फॉसिल फ्यूल, न्यूक्लियर पावर, हाइड्रोपावर, हाइड्रोजन, कम-कार्बन वाली तकनीकों और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को अहम माना. ब्रिक्स ने कम और जीरो इमिशन वाले हाइड्रोजन के लिए कॉमन स्टैडर्ड और सर्टिफिकेशन सिस्टम पर सहयोग को भी एनकरेज किया और हाइड्रोजन वैल्यू चेन पर एक ज्वॉइंट रिपोर्ट तैयार करने के चल रही कोशिशों का जिक्र किया.

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