जी-राम-जी विधेयक को लेकर विपक्ष के आंदोलन के काट के लिए भारतीय जनता पार्टी(BJP) ने संगठित और आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है. पार्टी ने तय किया है कि जी-राम-जी कानून को लेकर बूथ स्तर तक अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम जनता को नए कानून के प्रावधानों और फायदों की जानकारी दी जाएगी.
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बीजेपी का क्या है मिशन?
बीजेपी इस अभियान के जरिए यह भी स्पष्ट करेगी कि मौजूदा मनरेगा कानून में क्या-क्या कमियाँ थीं और ग्रामीण रोजगार गारंटी को ज्यादा प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नया कानून क्यों जरूरी था. पार्टी का फोकस इस बात पर रहेगा कि जनता को यह समझाया जाए कि जी-राम-जी कानून किस तरह पुराने कानून से बेहतर है, कैसे इसमें रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी की गई है, निगरानी और जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था बनाई गई है.इसी रणनीति के तहत शनिवार को बीजेपी ने जी-राम-जी विधेयक पर दो दौर की अहम बैठकों का आयोजन किया. वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई इन बैठकों में मुख्यमंत्री, अलग-अलग राज्यों के बीजेपी अध्यक्ष, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य और प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए. इन बैठकों में देशभर से 1,100 से अधिक नेताओं ने हिस्सा लिया.
BJP के दिग्गजों ने क्या कहा?
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में जी-राम-जी कानून पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया. उन्होंने कानून के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी और इसके फायदों को विस्तार से समझाया. शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि कानून का संदेश जमीनी स्तर तक पहुंचे और जनता के बीच इसके फायदों को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे.बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी जी-राम-जी कानून पर अपनी बात रखते हुए इसे श्रमिक कल्याण की दिशा में बड़ा कदम बताया. नितिन नबीन ने कहा कि इस अभियान की विस्तृत कार्ययोजना एक-दो दिन में तैयार कर सभी राज्यों और संगठन इकाईयों के साथ साझा की जाएगी.
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क्या होगा खास?
पार्टी ने यह भी तय किया है कि प्रदेश संगठन स्तर पर अलग-अलग बैठकें कर राज्य नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को तथ्यों के साथ मैदान में उतारा जाएगा, ताकि विपक्ष के नैरेटिव का प्रभावी ढंग से जवाब दिया जा सके. बैठक में बीजेपी नेतृत्व की ओर से इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खासकर ग्रामीण जनता तक यह संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचे कि यह कानून श्रमिकों के हित में है और अधिक जवाबदेही को बढ़ावा देता है. नेताओं और कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर से ही जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है.
अरुण सिंह करेंगे नेतृत्व
बैठक में यह भी बताया गया कि आने वाले दिनों में पार्टी कई जनसंपर्क कार्यक्रमों को अंतिम रूप देकर उनका रोडमैप साझा करेगी. गहन जमीनी अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस, नुक्कड़ सभाएं और घर-घर संपर्क जैसे कार्यक्रमों को शामिल किया जाएगा.जी-राम-जी योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और प्रचार-प्रसार की निगरानी के लिए बीजेपी ने महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में एक निगरानी टीम का भी गठन किया है. पार्टी का मानना है कि संगठित अभियान के जरिए विपक्ष के विरोध का जवाब दिया जाएगा और जनता के बीच नए कानून को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया जाएगा.
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जी-राम-जी विधेयक को लेकर विपक्ष के आंदोलन के काट के लिए भारतीय जनता पार्टी(BJP) ने संगठित और आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है. पार्टी ने तय किया है कि जी-राम-जी कानून को लेकर बूथ स्तर तक अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम जनता को नए कानून के प्रावधानों और फायदों की जानकारी दी जाएगी.
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बीजेपी का क्या है मिशन?
बीजेपी इस अभियान के जरिए यह भी स्पष्ट करेगी कि मौजूदा मनरेगा कानून में क्या-क्या कमियाँ थीं और ग्रामीण रोजगार गारंटी को ज्यादा प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नया कानून क्यों जरूरी था. पार्टी का फोकस इस बात पर रहेगा कि जनता को यह समझाया जाए कि जी-राम-जी कानून किस तरह पुराने कानून से बेहतर है, कैसे इसमें रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी की गई है, निगरानी और जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था बनाई गई है.इसी रणनीति के तहत शनिवार को बीजेपी ने जी-राम-जी विधेयक पर दो दौर की अहम बैठकों का आयोजन किया. वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई इन बैठकों में मुख्यमंत्री, अलग-अलग राज्यों के बीजेपी अध्यक्ष, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य और प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए. इन बैठकों में देशभर से 1,100 से अधिक नेताओं ने हिस्सा लिया.
BJP के दिग्गजों ने क्या कहा?
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में जी-राम-जी कानून पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया. उन्होंने कानून के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी और इसके फायदों को विस्तार से समझाया. शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि कानून का संदेश जमीनी स्तर तक पहुंचे और जनता के बीच इसके फायदों को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे.बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी जी-राम-जी कानून पर अपनी बात रखते हुए इसे श्रमिक कल्याण की दिशा में बड़ा कदम बताया. नितिन नबीन ने कहा कि इस अभियान की विस्तृत कार्ययोजना एक-दो दिन में तैयार कर सभी राज्यों और संगठन इकाईयों के साथ साझा की जाएगी.
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क्या होगा खास?
पार्टी ने यह भी तय किया है कि प्रदेश संगठन स्तर पर अलग-अलग बैठकें कर राज्य नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को तथ्यों के साथ मैदान में उतारा जाएगा, ताकि विपक्ष के नैरेटिव का प्रभावी ढंग से जवाब दिया जा सके. बैठक में बीजेपी नेतृत्व की ओर से इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खासकर ग्रामीण जनता तक यह संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचे कि यह कानून श्रमिकों के हित में है और अधिक जवाबदेही को बढ़ावा देता है. नेताओं और कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर से ही जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है.
अरुण सिंह करेंगे नेतृत्व
बैठक में यह भी बताया गया कि आने वाले दिनों में पार्टी कई जनसंपर्क कार्यक्रमों को अंतिम रूप देकर उनका रोडमैप साझा करेगी. गहन जमीनी अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस, नुक्कड़ सभाएं और घर-घर संपर्क जैसे कार्यक्रमों को शामिल किया जाएगा.जी-राम-जी योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और प्रचार-प्रसार की निगरानी के लिए बीजेपी ने महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में एक निगरानी टीम का भी गठन किया है. पार्टी का मानना है कि संगठित अभियान के जरिए विपक्ष के विरोध का जवाब दिया जाएगा और जनता के बीच नए कानून को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया जाएगा.
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