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NCERT ने अब सार्वजनिक रूप से मांगी माफी, हटाया विवादित न्यायपालिका चैप्टर, CJI ने लिया था संज्ञान

NCERT ने न्यायपालिका के एक चैप्टर को शामिल करने पर अब सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। एनसीईआरटी ने बिना शर्त के माफी मांगी। साथ ही बताया कि पूरी पुस्तकें वापस मंगा ली हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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Edited By : Raghav Tiwari Updated: Mar 10, 2026 13:39

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने विवादित न्यायपालिका के एक चैप्टर को शामिल करने पर अब सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। एनसीईआरटी ने बिना शर्त के माफी मांगी। साथ ही बताया कि पूरी पुस्तकें वापस मंगा ली हैं और अब किताब में वह विवादित चैप्टर शामिल नहीं है।

एनसीईआरटी ने एक्स पर ट्वीट कर बताया कि हाल ही में सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक, “समाज की खोज: भारत और उससे परे” कक्षा 8 (भाग II) प्रकाशित की थी। इसमें अध्याय IV “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक से शामिल था। लिखा कि एनसीईआरटी के डायरेक्टर और सदस्य उक्त अध्याय IV के लिए बिना शर्त और पूर्ण क्षमा याचना करते हैं। पूरी पुस्तक वापस ले ली गई है और अब उपलब्ध नहीं है।

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यह भी पढ़ें: कैसे और कौन तय करता है NCERT की किताब का चैप्टर, बदलने से पहले किसकी इजाजत

एनसीईआरटी ने लिखा कि – 𝐖𝐞 𝐬𝐢𝐧𝐜𝐞𝐫𝐞𝐥𝐲 𝐫𝐞𝐠𝐫𝐞𝐭 𝐭𝐡𝐞 𝐢𝐧𝐜𝐨𝐧𝐯𝐞𝐧𝐢𝐞𝐧𝐜𝐞” 𝐜𝐚𝐮𝐬𝐞𝐝 𝐚𝐧𝐝 𝐚𝐩𝐩𝐫𝐞𝐜𝐢𝐚𝐭𝐞 𝐭𝐡𝐞 𝐮𝐧𝐝𝐞𝐫𝐬𝐭𝐚𝐧𝐝𝐢𝐧𝐠 𝐨𝐟 𝐚𝐥𝐥 𝐬𝐭𝐚𝐤𝐞𝐡𝐨𝐥𝐝𝐞𝐫𝐬.”

यह भी पढ़ें: ‘माफी से काम नहीं चलेगा…’, NCERT को CJI की कड़ी फटकार, अवमानना और कारण बताओ

दरअसल, हाल ही में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रस्टाचार’ का अंश जोड़ा था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वत: संज्ञान लिया था। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने NCERT की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रस्टाचार’ नाम से एक अंश के पढ़ाये जाने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि जुडीशियरी को बदनाम करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

CJI ने कहा था कि ऐसा लगता है जैसे न्यायपालिका को संस्था के तौर बदनाम करने की कोशिश की गई है। जनमानस और छोटे बच्चों के दिमाग में न्यायपालिका की एक छवि डालने की कोशिश हुई है। पूर्व चीफ जस्टिस के कहे गए कुछ शब्दों को जानबूझकर चुना गया। यह दर्शाने की कोशिश हुई कि भ्रष्टाचार के बहुत से मामले न्यायपालिका को लेकर ही दायर होते हैं, जिनकी कोई सुनवाई नहीं होती। यह बदनाम करने की साजिश ही तो है।

First published on: Mar 10, 2026 10:03 AM

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