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पांच राज्यों में चुनाव से पहले विपक्ष की बड़ी तैयारी, क्या CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आएगा महाभियोग प्रस्ताव?

भारतीय राजनीति में एक और बड़ा संवैधानिक टकराव देखने को मिल सकता है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के निपटारे के तुरंत बाद विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुटी है कांग्रेस, दो वरिष्ठ विपक्षी नेताओं ने सोमवार को इसकी पुष्टि की.

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पांच राज्यों में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया है. विपक्षी दल जल्द ही उनके खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन या महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुटे हैं. अगर विपक्ष संसद में महाभियोग का नोटिस देता है तो देश में पहली बार होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग आएगा. एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इंडिया गठबंधन के सहयोगियों से बातचीत हो चुकी है और सभी दल विभिन्न राज्यों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची की गहन संशोधन प्रक्रिया को लेकर CEC के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तैयार हैं.

SIR विवाद क्यों गरमाया?

विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगा रहा है. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए जानबूझकर विपक्षी समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने पिछले साल से ही इस मुद्दे पर बड़ा अभियान चलाया और वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन अदालत ने प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई. विपक्ष का कहना है कि SIR से लाखों वैध मतदाताओं के नाम कट सकते हैं, जिससे लोकतंत्र पर असर पड़ रहा है.

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क्या है हटाने की प्रक्रिया?

2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना आसान नहीं है. संविधान के अनुसार, उन्हें केवल ‘महाभियोग’ के जरिए ही हटाया जा सकता है, जो ठीक वैसी ही प्रक्रिया है जैसी सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए अपनाई जाती है. यानी केवल संसद के दोनों सदनों में महाभियोग के जरिए ही पद से हटाया जा सकता है. प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा –किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है.

लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं, तभी नोटिस विचार के लिए स्वीकार होगा. संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है. यह प्रक्रिया बेहद कठिन है और इतिहास में कभी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव नहीं आया.

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First published on: Mar 10, 2026 11:15 AM

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Vijay Jain

विजय जैन भारतीय मीडिया जगत का एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित नाम हैं. वर्तमान में न्यूज 24 में सीनियर न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत विजय को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 23 से अधिक वर्षों का लंबा और समृद्ध अनुभव है. राजनीति, चुनाव, बिजनेस, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसी हर प्रमुख बीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले विजय अपनी निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. पत्रकारिता में उनके अद्वितीय योगदान और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए उन्हें साल 2018 में प्रतिष्ठित 'नेशनल श्रीफल अवार्ड' से सम्मानित किया गया था. डिजिटल दौर में वे ट्रेडिशनल जर्नलिज्म के अनुभवों को न्यू-एज मीडिया और SEO स्ट्रेटेजी के साथ जोड़कर खबरों को नया आयाम दे रहे हैं.

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