ऑस्ट्रेलिया ने भारत के अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों और निर्यातकों को बड़ा झटका दिया है. ऑस्ट्रेलियाई फेडरल कोर्ट ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की बासमती चावल को खास पहचान दिलाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. उन्होंने बासमती के लिए खास ट्रेडमार्क की मान्यता मांगी थी. APEDA की याचिका खारिज होने के बाद हरियाणा और पंजाब के किसान तनाव में हैं. ये दोनों राज्य सबसे ज्यादा बासमती चावल उगाते हैं और ऑस्ट्रेलिया उनके लिए एक बड़ा हब है. उधर, APEDA की याचिका खारिज होने के बाद पाकिस्तान काफी खुश है, क्योंकि वो भी ऑस्ट्रेलिया को बासमती का निर्यात करता है. अब भारत और पाकिस्तान के बीच बासमती को लेकर कांटे की टक्कर होगी.
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क्यों खारिज हुई याचिका?
APEDA ने ऑस्ट्रेलिया के सामने मांग रखी थी कि बासमती को सर्टिफिकेशन ट्रेडमार्क के तौर पर रजिस्टर किया जाए. भारत की तरफ से ये दलील पेश की गई थी कि बासमती एक खास प्रोडक्ट है और उसे GI टैग भी मिला हुआ है. इसपर ऑस्ट्रेलिया की कोर्ट ने कहा कि बासमती चावल भारत और पाकिस्तान दोनों में पैदा होता है, इसलिए सिर्फ एक देश को खास मान्यता नहीं मिल सकती. भारत ने इससे पहले 2019 में भी ये याचिका दायर की थी, जिसे रिजेक्ट कर दिया गया था.
पाकिस्तान ने क्या कहा?
पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलियाई फेडरल कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. शहबाज सरकार का कहना है कि बासमती भारत और पाकिस्तान दोनों की विरासत है. आपको बता दें कि पहले भारत ऑस्ट्रेलिया को ज्यादा बासमती चावल निर्यात करता था. 1988-2018 के बीच भारत ने ऑस्ट्रेलिया को लाखों टन बासमती भेजा, जबकि पाकिस्तान इतना चावल नहीं निर्यात करता था. अब APEDA की याचिका खारिज होने के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों को बराबर बासमती चावल निर्यात करना होगा, जिससे भारतीय निर्यातकों पर बोझ बढ़ सकता है. अकेला पंजाब ही देश का करीब 40 प्रतिशत बासमती का उत्पादन करता है. पंजाब के किसानों और निर्यातक ऑस्ट्रेलिया को बड़ी मात्रा में बासमती सप्लाई करते हैं. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया का ये फैसला उनकी मुश्किलें बढ़ा देगा.
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