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अचानक लोगों से दूरी बनाने लगे हैं? AIIMS से जानिए उदासी और चिड़चिड़ापन कब हो सकते हैं सिजोफ्रेनिया के संकेत

अगर किसी के बिहेवियर में लगातार बदलाव दिख रहा है और इसका असर पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों या रोजाना की जिंदगी पर पड़ रहा है तो AIIMS में मनोचिकित्सा विभाग मानसिक स्वास्थ्य ने बताया है कि यह सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारी का संकेत हो सकता है. 

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क्या लोगों से दूरी बनाना शुरुआती संकेत हो सकता है? Image Credit- Freepik

कई बार किसी इंसान में अचानक बदलाव नजर आने लगते हैं. वह पहले की तुलना में कम लोगों से बात करता है, अकेले रहना पसंद करने लगता है, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो जाता है या पहले पसंद आने वाली चीजों में उसकी रुचि कम हो जाती है. ऐसे बदलाव देखकर परिवार के लोग परेशान हो सकते हैं और दिमागी बीमारी समझ बैठते हैं. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर उदासी, चिड़चिड़ापन या अकेले रहना सिजोफ्रेनिया नहीं होता. इन लक्षणों के पीछे स्ट्रेस डिप्रेशन, चिंता या दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं. सिजोफ्रेनिया में आमतौर पर सोच, व्यवहार, इमोशन और असल चीजों को समझने की क्षमता में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं.

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इन बदलावों पर दें खास ध्यान

  • लोगों से अचानक दूरी बनाना 
  • चीजों से रुचि कम होना
  • खुद की देखभाल कम करना  
  • बातचीत या सोच का तरीका बदलना 
  • चिड़चिड़ा होना

सिजोफ्रेनिया क्या है?

सिजोफ्रेनिया एक गंभीर दिमागी समस्या है, जिसमें इंसान के सोचने, महसूस करने, व्यवहार करने और आसपास की चीजों को समझने के तरीके में बदलाव आ सकता है. AIIMS ने बताया कि सिजोफ्रेनिया से जुड़े लक्षणों में भ्रम, ऐसी चीजें सुनना या महसूस करना जो असल में मौजूद नहीं हैं, सोच और बोलने में गड़बड़ी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.  

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क्या लोगों से दूरी बनाना शुरुआती संकेत हो सकता है?

लोगों से दूरी बनाना या लोगों से बातचीत कम कर देना कुछ लोगों में सिजोफ्रेनिया से जुड़े बदलावों का हिस्सा हो सकता है. सरकारी मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण सामग्री में सोशल विदड्रॉल, रोजाना की जिम्मेदारियों से दूरी और नॉर्मल बिहेवियर को साइकोसिस से जुड़े लक्षणों में शामिल किया गया है, लेकिन सिर्फ किसी इंसान का अकेले रहना इस बीमारी का रूल नहीं है.

उदासी और चिड़चिड़ापन को कैसे समझें?

सिजोफ्रेनिया के साथ कुछ लोगों में डिप्रेशन जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं. AIIMS की सामग्री में सिजोफ्रेनिया के दौरान डिप्रेसिव लक्षणों का जिक्र किया गया है. इसलिए अगर कोई इंसान लंबे समय से उदास रहता है, किसी काम में रुचि नहीं लेता, लोगों से दूरी बनाने लगा है या उसके बिहेवियर में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है तो इसे सिर्फ उसका बिहेवियर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source- AIIMS 

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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