कई बार किसी इंसान में अचानक बदलाव नजर आने लगते हैं. वह पहले की तुलना में कम लोगों से बात करता है, अकेले रहना पसंद करने लगता है, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो जाता है या पहले पसंद आने वाली चीजों में उसकी रुचि कम हो जाती है. ऐसे बदलाव देखकर परिवार के लोग परेशान हो सकते हैं और दिमागी बीमारी समझ बैठते हैं. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर उदासी, चिड़चिड़ापन या अकेले रहना सिजोफ्रेनिया नहीं होता. इन लक्षणों के पीछे स्ट्रेस डिप्रेशन, चिंता या दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं. सिजोफ्रेनिया में आमतौर पर सोच, व्यवहार, इमोशन और असल चीजों को समझने की क्षमता में कई तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं.
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इन बदलावों पर दें खास ध्यान
- लोगों से अचानक दूरी बनाना
- चीजों से रुचि कम होना
- खुद की देखभाल कम करना
- बातचीत या सोच का तरीका बदलना
- चिड़चिड़ा होना
सिजोफ्रेनिया क्या है?
सिजोफ्रेनिया एक गंभीर दिमागी समस्या है, जिसमें इंसान के सोचने, महसूस करने, व्यवहार करने और आसपास की चीजों को समझने के तरीके में बदलाव आ सकता है. AIIMS ने बताया कि सिजोफ्रेनिया से जुड़े लक्षणों में भ्रम, ऐसी चीजें सुनना या महसूस करना जो असल में मौजूद नहीं हैं, सोच और बोलने में गड़बड़ी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
क्या लोगों से दूरी बनाना शुरुआती संकेत हो सकता है?
लोगों से दूरी बनाना या लोगों से बातचीत कम कर देना कुछ लोगों में सिजोफ्रेनिया से जुड़े बदलावों का हिस्सा हो सकता है. सरकारी मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण सामग्री में सोशल विदड्रॉल, रोजाना की जिम्मेदारियों से दूरी और नॉर्मल बिहेवियर को साइकोसिस से जुड़े लक्षणों में शामिल किया गया है, लेकिन सिर्फ किसी इंसान का अकेले रहना इस बीमारी का रूल नहीं है.
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उदासी और चिड़चिड़ापन को कैसे समझें?
सिजोफ्रेनिया के साथ कुछ लोगों में डिप्रेशन जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं. AIIMS की सामग्री में सिजोफ्रेनिया के दौरान डिप्रेसिव लक्षणों का जिक्र किया गया है. इसलिए अगर कोई इंसान लंबे समय से उदास रहता है, किसी काम में रुचि नहीं लेता, लोगों से दूरी बनाने लगा है या उसके बिहेवियर में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है तो इसे सिर्फ उसका बिहेवियर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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Source- AIIMS