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दिल्ली में होने वाली नकली बारिश में भीग गए तो शरीर पर क्या असर होगा? जानिए Artificial Rain के प्रभाव

Artificial Rain Effects On Body: दिल्ली की जहरीली हवा को कम करने और वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए दिल्ली में आर्टिफिशियल रेन यानी कृत्रिम बारिश या कहें नकली बारिश की तैयारी हो रही है. यह बारिश आपके शरीर को किस तरह प्रभावित कर सकती है जानिए यहां.

Author Written By: Seema Thakur Updated: Oct 30, 2025 19:32
Artificial Rain
कृत्रिम बारिश के दुष्प्रभाव क्या हैं?

Delhi Artificial Rain: दिवाली पर दिल्ली की हालत साल-दर-साल बिगड़ती ही है. वायु प्रदूषण के चलते दिल्ली की एयर क्वालिटी (Delhi Air Quality) सेहत के लिए खतरनाक होने के लेवल तक आ चुकी है. आयदिन दिल्ली का AQI 400 के पार जाता है. ऐसे में वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए और जहरीली हवा को साफ करने के लिए दिल्ली में कृत्रिम बारिश की तैयारियां चल रही हैं. कृत्रिम बारिश क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) प्रोसेस से की जाएगी. ऐसे में यहां जानिए कृत्रिम बारिश किस तरह होती है और इसके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ सकते हैं

कृत्रिम बारिश कैसे होती है

कृत्रिम बारिश क्लाउड सीडिंग से होती है. क्लाउड सीडिंग वेदर मोडिफिकेशन तकनीक है जिसमें बादल में कुछ पार्टिकल्स डाले जाते हैं और बारिश होने लगती है इस प्रक्रिया में सिल्वर आयोडाइड या सॉल्ट बेस्ड पार्टिकल्स मॉइस्चर से भरे बादल में डाले जाते हैं और पानी के कण इन पार्टिकल्स के आसपास इकट्ठे हो जाते हैं जिससे बारिश होने लगती है. दिल्ली का प्रोजेक्ट मोडिफाइड Cessna-206H एयरक्राफ्ट के इस्तेमाल से सीडिंग एजेंट को बादलों में डालेगा. IIT कानपुर की रिसर्च और टेक्निकल सपोर्ट से और दिल्ली एन्वायरमेंट डिपार्टमेंट के साथ आने से कृत्रिम बारिश की जाएगी.

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नकली बारिश का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है

कृत्रिम बारिश से वातावरण साफ होता है और वायु प्रदूषण (Air Pollution) कम हो सकता है, लेकिन यह कृत्रिम बारिश के कुछ नुकसान भी हैं. इसमें इस्तेमाल होने वाला सिल्वर आयोडाइड केमिकल मिट्टी और पानी में जमा हो सकता है जिससे इकोसिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं. इसके अलावा, अगर प्रकृति से किसी तरह की छेड़छाड़ की जाए तो मौसम का पैटर्न बदल सकता है.

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श्वसन संबंधी दिक्कतें – सिल्वर आयोडाइड यूं तो कम टॉक्सिसिटी वाला केमिकल है लेकिन अगर कोई व्यक्ति इसकी बहुत ज्यादा चपेट में आता है तो उसे श्वसन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. खासतौर से जिन लोगों को अस्थमा या ब्रोंकाइटिस है उन्हें इस बारिश से बचना चाहिए.

स्किन पर इरिटेशन – स्किन की इरिटेशन (Skin Irritation) जैसे इफेक्ट्स भी नजर आ सकते हैं. इसीलिए इस बारिश में जरूरत से ज्यादा भीगने से परहेज करना चाहिए.

इन बातों का रखें ख्याल

  • जिस समय नकली बारिश होने वाली है उस समय बारिश वाले एरिया में निकलने से परहेज करें.
  • अगर आप नकली बारिश में भीग गए हैं तो घर आकर नहा लें.
  • मास्क पहनकर ही बाहर निकलें और शरीर को ढकने वाले पूरे कपड़े पहनें.
  • आर्टिफिशियल बारिश वाले पानी को ना पिएं. घर के आस-पास का पानी अगर इस बारिश के संपर्क में आया है तो उसे फिल्टर करके ही पिएं.
  • आर्टिफिशियल बारिश से संबंधित अपडेट्स और वॉर्निंग साइन वगैरह के बारे में पता करते रहें.

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Oct 30, 2025 07:32 PM

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