Prostate Problems: ऐसी बहुत सी दिक्कतें हैं जिनके लक्षण पेशाब की दिक्कतों से पहचाने जा सकते हैं. खासकर 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को कुछ दिक्कतें कभी इग्नोर नहीं करनी चाहिए. AIIMS, दिल्ली के यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. ऋषि नय्यर ने एम्स के ऑफिशियल चैनल से पोस्ट हुए एक वीडियो में बताया है कि पुरुषों को पेशाब से जुड़ी किन दिक्कतों पर खास ध्यान देना चाहिए और रात में बार-बार उठकर पेशाब करने (Baar Baar Peshab Aana) की दिक्कत किस बीमारी का लक्षण हो सकती है.

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बार-बार पेशाब करने की दिक्कत

डॉ. ऋषि नय्यर बताते हैं कि अगर आपकी उम्र 50 वर्ष से ज्यादा है, आप पुरुष हैं और रात में बार-बार पेशाब करने के लिए उठ रहे हैं, पेशाब की धार कमजोर हो गई है या मूत्राशय पूरी तरह से खाली ना होने का एहसास होता है तो आपका शरीर, खासकर आपका मूत्र मार्ग और प्रोस्टेट आपको कुछ बताने की कोशिश कर रहे हैं. असल में ये लक्षण अलग-अलग दिक्कत के चलते नहीं हैं बल्कि लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट सिम्टम्स हैं. अक्सर इनका कारण बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया (BPH) यानी बढ़ा हुआ प्रोस्टेट होता है. यह 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में बेहद आम है.

इन लक्षणों को इग्नोर करने पर क्या होता है

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डॉ. ऋषि नय्यर बताते हैं कि प्रोस्टेट की दिक्कतों (Prostate Problems) के इन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए. ये दिक्कतें आपकी दिनचर्या, नींद, काम करने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं. वहीं, बढ़ा हुआ प्रोस्टेट आगे चलकर गंभीर जटिलताएं भी पैदा कर सकता है.

बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया क्या है

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प्रोस्टेट एक छोटी अखरोट के आकार की ग्रंथि है जो मूत्राशय के ठीक नीचे मूत्र नली यानी यूरेथरा को चारों ओर से घेरे रहती है. उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का आकार स्वाभाविक रूप से बढ़ता है. कई पुरुषों में यह वृद्धि यूरेथरा पर दबाव डालती है जिससे मूत्र संबंधी लक्षण धीरे-धीरे और बढ़ने लगते हैं.

क्या बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया कैंसर है?

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बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया यानी बीपीएच कैंसर नहीं है और यह कैंसर में नहीं बदलता है, लेकिन अगर इसका इलाज ना किया जाए तो यह जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है. कई मामलों में यह मूत्र संक्रमण, पेशाब रुकना और किडनी नुकसान जैसी जटिलताएं भी पैदा कर सकता है. बहुत से मरीज इस दिक्कत से दोचार होते रहने के बाद भी काफी समय बाद इलाज के लिए जाते हैं जिससे किडनी की कार्यक्षमता अत्यधिक प्रभावित हो चुकी होती है.

इन लक्षणों पर दें खास ध्यान

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प्रोस्टेट की दिक्कतों से बचने के लिए कुछ लक्षणों पर खास नजर रखा जरूरी है. खासकर 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में यह संकेत दिखें तो यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है. ये लक्षण हैं -

  • रात में 2 या उससे ज्यादा बार पेशाब करने के लिए उठना
  • पेशाब रुक-रुककर आना
  • पेशाब शुरू करने में कठिनाई होना
  • मूत्राशय पूरी तरह खाली ना होने का एहसास होना
  • अचानक और तेज पेशाब की इच्छा होना

यह लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं और इसीलिए अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. लेकिन, ये धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं और इनका जितनी जल्दी समाधान किया जाए उपचार के विकल्प भी उतने ही ज्यादा होते हैं.

BPH का क्या इलाज है

बीपीएच का इलाज पूरी तरह संभव है और इसके इलाज के कई विकल्प उपलब्ध हैं. जीवनशैली में बदलाव, जैसे कुछ तरल पदार्थ का सेवन सीमित करना, शाम के समय कम पानी पीना, मूत्रवर्धक दवाएं दिन में लेना, कैफीन या शराब से परहेज करना, आदि.

मूत्राशय को शिथिल करने वाली या ग्रंथि को समय के साथ सिंकोड़ने वाली दवाएं भी उपलब्ध हैं. जो लक्षण दवाओं से ठीक नहीं होते उनके लिए कई तरह की मिनमली इनवेजिव सर्जरीज की जाती हैं. फिर भी अगर ठीक ना हो तो TURP या लेजर एन्यूक्लिएशन जैसी प्रक्रियाएं की जा सकती हैं.

ज्यादातर मामलों में केवल जीवनशैली में बदलाव से ही प्रोस्टेट से जुड़े लक्षणों का नियंत्रण किया जा सकता है. यह भी जानना जरूरी है कि किसी भी मूत्र संबंधी लक्षण का अर्थ सिर्फ बढ़ा हुआ प्रोस्टेट (Enlarged Prostate) ही नहीं है बल्कि प्रोस्टेट कैंसर, मूत्राशय की बीमारियां, स्ट्रोक, स्पाइनल कोर्ड इंजरी जैसी अन्य समस्याओं में भी ये लक्षण दिख सकते हैं. इसीलिए किसी भी उपचार से पहले यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.