कान से कट-कट की आवाज क्यों आती है? आचार्य बालकृष्ण ने बताया कैसे रुकेगा कान बजना

Kaan Me Awaz Aana: अगर आपके कान से भी आवाज आती है और समझ नहीं आता है कि कान से आवाज आने को कैसे बंद करें तो यहां जानिए कान क्यों बजते हैं और आचार्य बालकृष्ण कान बजने की दिक्कत का क्या घरेलू उपाय बता रहे हैं.

Kaan Me Awaz Aana

कान में झींगुर की आवाज आने का क्या कारण है?

Kaan Me Seeti Ki Awaz Aana: कान से कट-कट, सन-सन, कान चटकने या सीटी बजने जैसी आवाज आने की दिक्कत को टिनिटस (Tinnitus) कहते हैं. यह दिक्कत सर्दी, जुकाम, एलर्जी, कान का मैल या साइनस होने पर होती है. ऐसे में जब थूक निगला जाता है या फिर जम्हाई ली जाती है तो कान के अंदर की ट्यूब खुलती और बंद होती है जिससे उसमें से आवाज आती है. कई बार इस स्थिति में व्यक्ति का कान भरा-भरा सा लगता है. अगर आप भी इसी तरह कान बजने (Kaan Bajna) की दिक्कत से परेशान हैं तो यहां जानिए आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) इस दिक्कत का क्या इलाज बता रहे हैं. आचार्य बालकृष्ण का बताया नुस्खा कान से आवाज आने की दिक्कत को दूर कर सकता है.

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कान बजता है तो क्या करें

आयुर्वेदाचार्य आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि कान बजता है तो आपको रोजाना प्राणायाम जरूर करना चाहिए. रोजाना 5 मिनट भस्त्रिका प्राणायाम और 15-20 मिनट कपालभाति प्राणायाम करने पर आराम मिल सकता है.

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दवा के रूप में सारिवादि वटी और शिलाजीत रसायन वटी का सेवन किया जा सकता है. रोजाना एक-एक गोली गर्म पानी से खाई जा सकती है.

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सरसों का तेल दिखाएगा असर

सरसों का तेल (Sarso Ka Tel) भी कान बजने की दिक्कत से छुटकारा दिला सकता है. आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि कान बजने की दिक्कत में सरसों का तेल आयुर्वेदिक औषधि की तरह काम करता है. इस्तेमाल के लिए 50 एमएल सरसों का तेल लेकर इसमें 10 ग्राम लहसुन की कलियों को छीलकर पका लें. लहसुन को कूटकर तेल में पकाने से इसका असर ज्यादा होता है. जब तेल में लहसुन पककर लाल हो जाए तो इसे छानें और इस तेल को हल्का गर्म कान में डालें. इस तेल की 4-4 बूंदे कानों में डाली जा सकती हैं.

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क्या कान में तेल डालना सही है?

आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि कान में तेल डालने को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यह सही नहीं है लेकिन आयुर्वेद ऐसा नहीं मानता है. आयुर्वेद के अनुसार, कान में तेल डालना बेहद फायदेमंद होता है. कान में तेल डाला जाए तो कान की सभी दिक्कतें दूर हो जाती हैं. बस इस बात का ध्यान रखें कि कान में जो भी तेल डाला जा रहा है वह शुद्ध हो.

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कान में कौन-कौन से तेल डाले जा सकते हैं?

आयुर्वेद में तेल को कान के लिए बेहद अच्छा माना जाता है. आचार्य बालकृष्ण के अनुसार कान में शुद्ध तिल का तेल, शुद्ध सरसों का तेल या फिर शुद्ध बादाम रोगन डाल सकते हैं. इन तेलों को कान में डाला जाए तो फायदा मिलता है. नहाने के बाद सिर और कानों में तेल डाला जा सकता है.

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कान में से आवाज आने के क्या कारण होते हैं

एलर्जी – सर्दी, जुकाम या साइनस जैसी दिक्कतों में कान में से आवाज आ सकती है.

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जबड़े की दिक्कत – जबड़े के जोड़ में कोई दिक्कत हो, दांत पिसते हों या फिर जबड़ा हिलाने और खाना चबाने में दिक्कत हो तो उससे भी कान से कट-कट की आवाज आती है.

कान में गंदगी – अगर कान में इयर वैक्स यानी गंदगी जमने लगे और सूखकर कान के पर्दे के पास जमा हो जाए तो इससे जबड़ा हिलने पर यह मैल कान के पर्दे से टकराता है और आवाज आती है.

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कान का पर्दा फटना – अगर व्यक्ति के कान का पर्दा फट जाता है तो इससे भी कट-कट की आवाज या झिंगुर जैसी आवाज आने लगती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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