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हेल्थ

आंखों की ये खतरनाक बीमारी छीन सकती है आपकी रोशनी! अभी जानें इसके शुरुआती लक्षण

आंखें हर किसी के लिए जरूरी होती हैं, लेकिन सही देखभाल की कमी के कारण आंखों में एक गंभीर बीमारी का खतरा बना रहता है, जो हमेशा के लिए रोशनी छीन सकता है. आइए जानते हैं कौन सी बीमारी के कारण आंखें देखना बंद कर देती हैं?

Author Written By: Azhar Naim Updated: Feb 22, 2026 10:45
EYE Problem
कौन सी आंखों की बीमारी रोशनी छीन लेती है?

कुदरत ने इस दुनिया को बहुत खूबसूरत बनाया है, यही वजह है कि इसे देखने को लिए उसनें इंसानों से लेकर जानवरों आदि सभी को आंख भी दी है. शरीर का ये अंग उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना दिल, दिमाग और फेफड़े. हालांकि, कई लोग ऐसे होते हैं, जो आंखों से देख नहीं सकते, उन्हें इस कारण बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. लेकिन जिन लोगों के पास आंख हैं, वह अपनी पूरी कोशिश करते हैं कि उनकी आंखों की सेहत बनी रहे. लेकिन आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि एक खतरनाक बीमारी ऐसी है, जो लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन लेती है. इस स्टोरी में हम उसी बीमारी के बारे में बात करेंगे और आपको उसके शुरुआती लक्षण भी बताएंगे.

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आंखों का ख्याल रखना बहुत जरूरी

आज के वक्त कई लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल इतनी ज्यादा खराब कर ली है कि वे देर रात तक जागे रहते हैं, मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं, बाहर का प्रदूषण उनकी आंखों को नुकसान पहुंचाता रहता है, जिससे बचाव के लिए वे कुछ करते नहीं हैं. इन्हीं सब चीजों के कारण आंखों पर दबाव पड़ने लगता है, जिसका नतीजा यह होता है कि एक गंभीर बीमारी जिसका नाम ग्लूकोमा है उसका खतरा बढ़ जाता है, जो व्यक्ति की आंखों को कमजोर कर हमेशा के लिए रोशनी छीन लेता है.

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क्या है खतरनाक बीमारी ग्लूकोमा

ग्लूकोमा (Glaucoma) को काला मोतिया (Kala Motiya) भी कहा जाता है, जिसमें आंखों के अंदर धीरे-धीरे दबाव बढ़ने लगता है, जिसका सीधा असर आंखों के ऑप्टिक नर्व यानी नेत्र तंत्रिका पर पड़ता है. शायद आपको मालूम न हो, यही वह नर्व है, जो आंखों से मिली जानकारी को दिमाग तक पहुंचाती है. इस बीमारी के कारण आंखों में इतना ज्यादा दबाव पड़ने लगता है कि यह नर्व कमजोर हो जाती है और इससे देखने की क्षमता कम हो जाती है.

नहीं दिखते शुरुआती लक्षण

आपको जानकर हैरानी होगी कि ग्लूकोमा के शुरुआती लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं देते हैं. हालांकि, जो लोग इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं, उन्हें आमतौर पर लगता है कि सब ठीक है आंखों में कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन वक्त के साथ-साथ धीर-धीरे रोशनी कम होती चली जाती है यानी वह विशेष नर्व कमजोर होने लगती है.
हालांकि, सामान्य जानकारी के अनुसार, जब इस बीमारी के कारण नजर कम होने लगती है, तो किनारों से दिखना कम होने लगता है, जिसे ब्लाइंड स्पॉट कहा जाता है. साथ ही, कई मामलों में सिर में दर्द, आंखों में दर्द, रोशनी के चारों ओर घेरे दिखना, आंखों का लाल होना, मतली और उल्टी जैसी शिकायतें भी सामने आती हैं, इसलिए कभी भी किसी भी संकेत को नजरअंदाज न करें.

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा

सामान्य जानकारी के अनुसार, ग्लूकोमा यानी काला मोतिया का खतरा बढ़ती उम्र में बढ़ जाता है, आमतौर पर 40 के बाद. साथ ही, जिन लोगों के परिवार में किसी को यह बीमारी रही हो उनमें भी इसका खतरा रहता है. इन सबके अलावा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, आंखों में गंभीर चोट, आंखों की पुरानी सर्जरी और यहां तक कि माइग्रेन भी ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

First published on: Feb 22, 2026 10:45 AM

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