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हेल्थ

योग, आयुर्वेद और नैचुरोपैथी से शरीर बनेगा निरोगी, बीमारियों को जड़ से खत्म करेंगे ये हॉलिस्टिक हीलिंग के तरीके

Holistic Healing: पतंजलि वेलनेस सेंटर में आप समग्र उपचार के लिए जा सकते हैं. यहां जानिए किस तरह योग, आयुर्वेद और नैचुरोपैथी से शरीर को रोगों से दूर रखा जा सकता है. हीलिंग के ये तरीके बीमारियों से बचाते हैं और शरीर को दुरुस्त रखते हैं.

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Written By: Seema Thakur Updated: Apr 2, 2026 16:56
Holistic Healing
इस तरह होगा समग्र उपचार.

Disease Free Life: योगगुरु स्वामी रामदेव योग को निरोगी जीवन का आधार बताते हैं. बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में पतंजलि वेलनेस सेंटर्स ना सिर्फ योग बल्कि आयुर्वेद और नैचुरोपैथी के माध्यम से शरीर को निरोगी बनाने पर फोकस करते हैं. रोजमर्रा की जिंदगी में तो व्यक्ति को कई तरह के काम करने की सलाह दी ही जाती है, वहीं, महीने में एक बार अगर पतंजलि वेलनेस सेंटर जाया जाए तो यहां योग, आयुर्वेद और नैचुरोपैथी ट्रीटमेंट्स की मदद से शरीर को डिटॉक्स किया जाता है, बीमारियों को ध्यान में रखकर थेरैपीज दी जाती हैं और शरीर को निरोगी बनाने के लिए आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट्स (Ayurvedic Treatments) दिए जाते हैं. ऐसे में यहां जानिए रोगों से छुटकारा पाने के लिए किस तरह योग, आयुर्वेद और नैचुरोपैथी सेहत को दुरुस्त रखने में मददगार होते हैं.

निरोगी शरीर के लिए योग थेरैपी

योग थेरैपी में व्यक्ति को प्राणायाम से लेकर कुछ योगासन करवाए जाते हैं. अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका आदि ब्रीदिंग टेक्नीक्स हैं जो बैलेंस रिस्टोर करने, शरीर की एनर्जी को ब्लॉक होने से बचाने और मेंटल क्लैरिटी लाने में मददगार हैं.

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भस्त्रिका – भस्त्रिका में पीठ और गर्दन को सीधा रखकर बैठा जाता है और गहरी सांस लेकर धीरे-धीरे छोड़ा जाता है. इस भस्त्रिका प्राणायाम को 5 से 10 मिनट तक किया जा सकता है.

कपालभाति प्राणायाम – कपालभाति में एकदम से सांस खींची जाती है और उतनी ही तेजी से सांस बाहर निकाली जाती है. इसमें इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि सांसें रिदम में अंदर ली जाएं और छोड़ी जाएं.

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अनुलोम विलोम – गर्दन और कमर को सीधा रखकर ध्यान की मुद्रा में बैठा जाता है. इसके बाद पहले नाक की एक तरफ से सांस लेकर दूसरी तरफ से छोड़ी जाती है और फिर दूसरी तरफ से भी यही प्रक्रिया दोहराई जाती है. अनुलोम विलोम प्राणायाम खासतौर से फेफड़ों को मजबूती देता है.

भ्रामरी प्राणायाम – भ्रामरी प्राणायाम में रिदम में 3 से 5 सेकंड के लिए सांस ली जाती है और 15 से 20 सेकंड के लिए लगातार छोड़ी जाती है. सांस छोड़ते हुए ओम का उच्चारण किया जाता है. 1 से 3 मिनट तक तकरीबन 7 बार भ्रामरी की जाती है.

आयुर्वेद के पास है हर रोग की दवा

आयुर्वेद में ऐसी जड़ी-बूटियों या कहें घर की ही चीजों का इस्तेमाल किया जाता है जो एक नहीं बल्कि अलग-अलग स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करने में मदद करती हैं. व्यक्ति दिनभर में कितनी ही टॉक्सिक चीजों के संपर्क में आता है. ऐसे में आयुर्वेदिक तरीके शरीर को केमिकल्स से बचाते हैं और टॉक्सिंस को दूर रखने में असर दिखाते हैं सो अलग.

आयुर्वेद में वायु तत्व, धरती तत्व, जल तत्व, आकाश तत्व और अग्नि तत्व की मदद से शरीर की अंदर से सफाई की जाती है और रोगों को ध्यान में रखते हुए ये थेरैपीज दी जाती हैं. आयुर्वेद सिखाता है कि आपको स्वस्थ रहने के लिए लग्जरी नहीं बल्कि सिंपल लाइफस्टाइल की जरूरत होती है, खानपान अगर सात्विक हो, घर का बना हुआ हो, सुबह उठकर गर्म पानी पिया जाए, अपनी सभी इंद्रियों की सफाई की जाए और एक्सरसाइज या योग को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए तो शरीर रोगों की चपेट में आने से बचता है.

नैचुरोपैथी से बीमारियां जड़ से खत्म होती हैं

पतंजलि नैचुरोपैथी सेंटर व्यक्ति को रोगों और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के आधार पर ट्रीटमेंट्स देते हैं. हिप बाथ से लेकर स्पाइनल बाथ और हॉट फूट बाथ शामिल है. नैचुरोपैथी में हाइड्रो थेरैपी, मड थेरैपी, मड थेरैपी, सन थेरैपी, कलर थर्मोलियम, एरो थेरैपी, ओपन एयर थेरैपी, योग थेरैपी, मैग्नेट थेरैपी, रेकी थेरैपी, कोलन इरिगेटर, मड स्विमिंग पूल, ओजोन सोना बाथ, वॉटर वेव मसाज, ओजोन बब्बल बाथ, सर्कुलर जेट मसाज, हाइड्रो जेट थेरैपी, गाइडलेंस के हिसाब से एक्यूप्रेशर और सभी तरह के ट्रीटमेंट्स अनुभवी डॉक्टरों और स्टाफ की मदद से मरीजों को दिए जाते हैं. इस तरह नैचुरोपैथी के माध्यम से रोगों को जड़ से दूर करने की कोशिश की जाती है.

यह भी पढ़ें – टॉक्सिंस से भर गया है शरीर तो इस गंदगी को निकालने में मदद करेंगी पतंजलि की डिटॉक्स थेरैपीज, बीमारियों का खतरा भी हो जाएगा कम

First published on: Apr 02, 2026 04:55 PM

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